पूनम विश्वकर्मा : ग़ज़ल की दुनिया में रूमानी शायरा की दस्तक

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पिछले कुछ दिनों से कवि सम्मेलनों एवं मुशायरे में अपनी रूमानी एवं जज़्बाती ग़ज़लें पढ़कर अचानक सुर्खियों में आई हरफनमौला व्यक्तित्व की धनी पूनम विश्वकर्मा (Poonam Vishwakarma) बेहतरीन गायिका भी हैं। उनके गाए सुनकर लगता है, उनके कंठ में साक्षात मां सरस्वती का वास है। शायराना मिज़ाज की पूनम जब बोलती हैं तो लगता है कोई शेर पढ़ रही हैं। उनके लेखन की ख़ासियत यह है कि सुनने या पढ़ने वाले को लगता है, कि रचना उसी के लिए उन्होंने सृजित किया है। उनकी रूमानी ग़ज़लें सीधे श्रोता के दिल को छू लेती हैं। उनकी कामयाबी का यही राज़ है। पिछले दिनों उन्होंने अखंडध्वनि के संपादक शीतला प्रसाद सरोज के साथ लंबी बातचीत की। पेश हैं उसी के अंशः

सवाल – इस साल सावन में आपने लाइव कज़री प्रोग्राम किया। यह विचार कैसे आया और यह कितना सफल रहा।

पूनम – दरअसल, मैं गायन के क्षेत्र में पिछले 22 साल से सक्रिय हूँ। मेरे कई लोकगीत तो यू-ट्यूब पर सुपरहिट हो चुके हैं। मेरे एक होली गीत को यू-ट्यूब पर 15 मिलियन यानी डेढ़ करोड़ लोग देख चुके हैं। इस साल मैं बारिश शुरू होते ही मित्रों के साथ बैठी थी तो अचानक कजरी लाइव प्रोग्राम का प्रोग्राम बन गया। फिर हमने सावन के चारों सोमवार को कजरी लाइव किया। पहले सोमवार, मेरे साथ संगत में मेरे गुरु और गुसाईं घराने के संगीताचार्य पंडित डॉ. श्यामरंग शुक्ला जी थे। तो दूसरे सोमवार, सोनू सिंह सुरीला जी, तीसरे सोमवार बलेंद्र विश्वकर्मा जी और चौथे सोमवार शिवम पांडेय जी ने मेरा साथ दिया। मेरी कजरी को अभूतपूर्व प्रतिसाद मिला और दुनिया भर में लाखों लोगों ने कजरी सुनीं। मेरी लिखी और गाई कज़री “घेरे-घेरे बरसता चारों ओरि बदरा, पिया हम जल बिन मछरी ना।” तो यू-ट्यूब पर अपलोड करते ही वायरल हो गई।

सवाल – आपकी शिक्षा-दीक्षा कहाँ से हुई और आप संगीत के क्षेत्र में कैसे आई।

पूनम – कविता, गीत, ग़ज़ल लिखने और गाने का शौक़ मुझे बचपन से था। इसलिए मैंने संगीत की पढ़ाई भी की। मुंबई मैं शुरू में मैंने हिंदी और भोजपुरी फिल्मों के लिए गीत और भजन लिखना शुरू किया। मेरे गीत और भजनों को अलका याग्निक, कुमार शानू, उदित नारायण, अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, श्रेया घोषाल, शान और मधुश्री जैसे शीर्ष गायकों की आवाज़ मिली है। चूंकि मैंने प्रयाग संगीत समिति से प्रभाकर की तालीम ले रखी थी तो मित्रों ने कहा कि मुझे गायन क्षेत्र में उतरना चाहिए। सो गुरु के आशीर्वाद से मैंने गायन शुरू कर दिया। एक संगीत कंपनी के लिए कुछ गाने गए। यह सिलसिला बहुत लंबा खिंचा और उस कंपनी के पंचानबे फ़ीसदी से ज़्यादा कटेंट मेरे लिखे और गाए हैं।

सवाल – अपने संगीत गायन के बारे में कुछ बताइए।

पूनम – जैसा कि मैं आपको बता चुकी हूं कि मैंने प्रयाग संगीत समिति से प्रभाकर की तालीम ले रखी है, तो पिछले महीने से लंबे अंतराल के बाद पुनः मैं अपने गुरु शास्त्रीय संगीत के मर्मज्ञ गोसाईं घराने के संगीताचार्य डॉ. पंडित श्यामरंग शुक्ला से राग व गायन की बारीक़ियाँ सीख रही हूँ। उनके साथ सीखने और संगत करने में मुझे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है।

सवाल – कहा जा रहा है कि आपकी ग़ज़लों से जज्बात छलकते हैं। आप मचों पर ग़ज़ल पढ़ना शुरू करती हैं तो लगता है बयान-ए-मोहब्बत कर रही हैं। तो अपनी कुछ ग़ज़लों के बारे में बताइए।

पूनम – मैं निजी जीवन में बड़ी संवेदनशील इंसान हूँ। मुझसे कोई तेज़ आवाज़ में बात भी करता तो टेंशन हो जाती है। मैं बचपन से गायिका और शायरा बनने के सपने देखती रही हूं। मुझे प्रेम-कहानियां पढ़ना बहुत प्रिय है। उसका असर आप मेरी पद्य रचनाओं में देख सकते हैं। मुझे जब-जब मौका मिलता है तो तब-तब मैं ग़ज़लें लिखती हूँ। इन दिनों मैं हर रोज़ कई-कई ग़ज़ले लिख देती हूँ। पिछले छह महीने में मैंने लगभग डेढ़ सौ ग़ज़ले लिखी। अब तक मैंने क़रीब दो सौ ग़ज़ले लिख डाली हैं और आप यक़ीन मानिए मेरी हर ग़ज़ल को संगीत में ढाल कर गाया जा सकता है। मैंने ख़ुद अपनी ग़ज़लों को गाने का फ़ैसला किया है। मेरी ग़ज़लों का पहला संग्रह “छलकते जज़्बात” शीघ्र ही प्रकाशित होने वाला है। इसके अलावा मैं एक उपन्यास लिखने की प्लानिंग कर रही हूँ।

सवाल – आपके यू-ट्यूब चैनल Poonam Vishwakarma Official पर भगवान राम के कई भजन हैं। आप इस बारे में कुछ बताइए।

पूनम – मैं भजन लिखती और गाती रहीं हूँ। अनूप जलोटा जी मेरे भजन गा चुके हैं। इस साल मेरे यू-ट्यूब चैनल की शुरुआत ही भगवान राम के भजन से हुई। चूंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बन रहा है, तो लेखिका और गायिका होने के नाते मेरे दिमाग़ में ख़्याल आया कि क्यों न में राम भजन की सीरीज़ पेश करूं, तो वही कर रही हूँ। मेरे चैनल पर कई राम भजन हैं, जिसे चाहें तो पाठक सुन सकते हैं।

सवाल – आप हर महीने के अमावस्या को दर्शन यात्रा कार्यक्रम करती है। इसका कैसा प्रतिसाद मिल रहा है।

पूनम – अभूतपूर्व प्रतिसाद… मेरे विश्वकर्मा भजनों की लोकप्रियता का आलम यह है कि मुझे कार्यक्रमों के प्रस्ताव मुम्बई व भारत के सभी राज्यों से आते रहते हैं पर कोविड के कारण कार्यक्रमों को छोड़ना पड़ा था। संगीत महोत्सवों के अलावा कई सामाजिक सांस्कृतिक कार्यक्रमो में मेरा गायन होता है। बतौर गायिका मुझे भजन साम्राज्ञी सम्मान, संगीत गौरव सम्मान, कलाश्री सम्मान और जाने कितनी बार समाज गौरव सम्मान मिल चुका है। इन्हीं कार्यक्रमों के दरमियान मुझे महाराष्ट्र, गुजरात, मारवाड़, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विश्वकर्मावंशियों से सम्मानित होने के साथ उन्हें करीब से जानने का अवसर मिला। इस प्रवास के दौरान ही अनगिनत लोगों और संस्थाओं द्वारा समाजहित में किए गए कार्यों को जानने का व उनके द्वारा निर्मित मंदिरों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

सवाल – अपनी पृष्ठिभूमि के बारे में कुछ बताइए।

पूनम – मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुआ। पिता डॉ रामजीत विश्वकर्मा पेशे से चिकित्सक और मेडिकल ऑफीसर रहे हैं। मेरी शिक्षा प्रतापगढ़ में हुई। पिताजी के साथ कई जगह रहने का मौका मिला। मेरी शादी जौनपुर में हुई और मैंने कर्मभूमि सपनों की नगरी मुंबई को बनाया। मेरे पिता मेरे आदर्श रहे हैं। मेरे अंदर मेरे माता-पिता दोनों के गुण हैं। पापा की संगीत व साहित्य में गहरी रुचि है। मैं उनकी प्रेरणा से ही गायन और लेखन क्षेत्र में उतरी हूं। साहित्य-प्रेम ने मुझे फिल्मों और अलबमों के लिए गीत लिखने को प्रेरित किया। मेरे लिखे गीत इतने हिट हुए कि हिंदी भोजपुरी अवधी फ़िल्मों में कई फिल्मों के लिए मुझे बेस्ट लीरिसिस्ट अवार्ड के लिए नामित किया गया।

(लेखक शीतला प्रसाद सरोज वरिष्ठ पत्रकार हैं।)