आदिवासी समुदाय के विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के सीएम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर आदिवासी कार्ड खेला है। आदिवासी समुदाय (Tribal Community) की द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने के बाद आदिवासी बाहुल्य राज्य छत्तीसगढ़ में भी आदिवासी विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की आबादी करीब 32 फीसदी है और अगले लोकसभा चुनाव में आदिवासी वोट भारतीय जनता पार्टी के लिए बोनस का काम करेंगे। अपनी सादगी के लिए भी जाने जाने वाले विष्णु देव साय राजनीत में अजातशत्रु माने जाते हैं।

वैसे चार बार लोकसभी सदस्य और केंद्रीय इस्पात राज्यमंत्री विनम्र वयक्तित्व के धनी विष्णु देव साय के नाम की घोषणा रविवार की शाम की गई। आइए जानते हैं कौन हैं विष्णु देव साय जिनके कंधे पर अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में लोकसभा में बेहतरीन प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी सौंपी है। विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ में आदिवासी का दर्जा हासिल करने वाले साहू (तेली) समुदाय के प्रतिनिधि हैं। उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव में हुआ था। राजनीति में आने से पहले वह किसान थे।

विष्णु देव ने अपना राजनीतिक करियर छत्तीसगढ़ के मध्य प्रदेश से अलग होने से पहले ही 1990-98 के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य के रूप में शुरू किया था। इस बार विधानसभा चुनाव में, उन्होंने कुनकुरी निर्वाचन क्षेत्र से मौजूदा कांग्रेस विधायक यूडी मिंज को हराया है। अजीत जोगी के बाद विष्णु देव छत्तीसगढ़ के दूसरे आदिवासी मुख्यमंत्री हैं।

विष्णु देव ने 1999 से 2014 तक रायगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से लगातार चार लोकसभा चुनाव जीते, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया था। बाद में उन्हें 2020 छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनाया दिया गया। इस बार कुनकरी में चुनावी जनसभा में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि कुनकरी से आप विष्णु देव साय को विधायक बना दीजिए मैं उन्हें बहुत बड़ा आदमी बना दूंगा। इस बार छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 90 में से 54 सीटें जीती है। वहीं 2018 में 68 सीट जीतने वाली कांग्रेस 35 सीट पर सिमट गई है।

विष्णुदेव साय की गिनती राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के करीबी नेताओं में होती है। उनको पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का करीबी भी बताया जाता है। राज्य में सीएम पद की रेस में विष्णुदेव साय के अलावा रेणुका सिंह का नाम भी शामिल था। रेणुका ने हाल ही में सासंद पद से इस्तीफा दिया था। वह भरतपुर सोनहत सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। राज्य में लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही थीं कि बीजेपी इस बार आदिवासी चेहरे को सीएम बना सकती है।

किसान परिवार से संबंध रखने वाले विष्णुदेव साय ने 1989 में अपने गांव बगिया से पंच पद से राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। 1990 में वह निर्विरोध सरपंच निर्वाचित हुए। इसके बाद तपकरा से विधायक चुनकर 1990 से 1998 तक वे मध्यप्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। 1999 में वे 13वीं लोकसभा के लिए रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। इसके बाद भाजपा ने उन्हें 2006 में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। इसके बाद 2009 में 15 वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में वे रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से फिर से सांसद निर्वाचित हुए।

2014 में 16वीं लोकसभा के लिए वे फिर से रायगढ़ से सांसद चुने गए। इस बार केंद्र में मोदी सरकार ने उन्हें राज्य मंत्री बनाकर इस्पात, खान, श्रम, रोजगार मंत्रालय बना दिया गया। वह 27 मई 2014 से 2019 तक राज्यमंत्री के रूप में काम किया। पार्टी ने 2 दिसंबर 2022 को उन्हें राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य और विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया। इसके बाद विष्णुदेव साय को 8 जुलाई 2023 को भाजपा ने राष्ट्रीय कार्यसमिति का सदस्य मनोनीत किया।

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