सरल भाषा में अच्छा गीत लिखना हुनर का काम – गीतकार संदीप नाथ

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मुंबई, मशहूर सिने गीतकार संदीप नाथ का मानना है कि एक कवि और एक गीतकार में फर्क़ होता है और सरल भाषा में अच्छा गीत लिखना जो सबकी समझ में आए बड़े हुनर का काम है। वस्तुतः गीतकार को सिचुएशन, चरित्र और फ़िल्म की कहानी के अनुसार गीत में कविता को पिरोना पड़ता है। इसलिए सिने गीत कविता से आगे निकल जाता है।

साहित्यिक संस्था चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई की केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट गोरेगांव के सभागार में आयोजित साप्ताहिक अड्डेबाज़ी में इस बार ख़ास तौर से पधारे संदीप नाथ ने सिने जगत में गीत लेखन की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि इजी और ऑर्डिनरी यानी सरल और साधारण में फर्क़ होता है।

संदीप नाथ ने मौजूद साहित्यकारों, कलाकारों और काव्य प्रेमियों की मौजूदगी में अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि और अपनी सिने यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने अपनी फ़िल्मों पेज़ थ्री, फ़ैशन, पान सिंह तोमर आदि से जुड़े उन्होंने रोचक संस्मरण सुनाए और स्वर कोकिला लता मंगेशकर से अपनी मुलाकात का उन्होंने हृदयस्पर्शी चित्रण किया। संदीप नाथ से श्रोताओं की रोमांचक चर्चा हुई।

उत्तर प्रदेश के एक बंगाली परिवार में जन्‍मे लोकप्रिय सिने गीतकार, कवि और लेखक संदीप नाथ ने बॉलीवुड की कई हिट फ़िल्मों को अपने ख़ूबसूरत गीतों से सजाया है। नेशनल अवार्ड विजेता फ़िल्म पेज़ थ्री, फैशन, कॉरपोरेट, सांवरिया, पान सिंह तोमर, आशिकी 2 और सिंघम रिटर्न जैसी कई कामयाब फ़िल्मों में उनके गीत शामिल हैं। देश के कई बड़े साहित्यिक आयोजनों में काव्य पाठ कर चुके संदीप नाथ का एक ग़ज़ल संग्रह और एक काव्य संग्रह प्रकाशित है।

बतौर सिने गीतकार ‘भूत’ (2003) संदीप नाथ की पहली फ़िल्म थी। पैसा वसूल, एक हसीना थी और रक्त जैसी फिल्मों के बाद मधुर भंडारकर की फ़िल्म ‘पेज़ थ्री’ में संदीप ने पांच गीत लिखे। तीन गीत बहुत लोकप्रिय हुए। वो गीत थे- लता जी का गाया “कितने अजीब रिश्‍ते हैं यहां पे…”, आशा जी का गाया “हुज़ूर हुज़ूरे आला… और सपना अवस्‍थी का गाया “कुवां मां डूब जाउंगी….” बहुत हिट हुए। इस फिल्‍म को राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिला।

संजय लीला भंसाली की फिल्‍म ‘सांवरिया’ में संदीप ने एक गीत लिखा-” यूं शबनमी पहले नहीं थी चांदनी”। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्‍ठ गीतकार का स्टारडस्ट अवॉर्ड मिला। सरकार, सरकार राज, कॉर्पोरेट, फैशन, जेम्स, साहब बीवी गैंग्‍स्‍टर, पान सिंह तोमर, बुलेट राजा, साहेब बीवी और गैंग्स्टर रिटर्न्स आदि फ़िल्मों में भी संदीप ने बढ़िया गीत लिखे।

“फैशन का है ये जलवा”, “ओ सिकंदर”, “लम्‍हा-लम्‍हा जिंदगी”, “रात मुझे कहकर चिढ़ाये”, “सुन रहा है ना तू” जैसे उनके कई गीत बहुत पसंद किए गए। यूट्यूब पर संदीप नाथ के ऐसे कई गीत मौजूद हैं जिनमें उन्होंने बतौर गीतकार, संगीतकार और गायक अपने फ़न का जलवा दिखाया है।

चर्चा के बाद कविता पाठ का सत्र चला जिसमें संदीप नाथ ने अपनी चुनिंदा ग़ज़लें और कविताएं सुनाईं। सभागार में मौजूद कुछ प्रमुख कवियों ने भी कविता पाठ किया। अंत में चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई के संयोजक और मशहूर गीतकार देवमणि पांडेय ने संदीप नाथ और उपस्थिति सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

रश्मिश्री, दमयंती शर्मा, सविता दत्त, रासबिहारी पांडेय, डॉ बनमाली चतुर्वेदी, नवीन चतुर्वेदी, राजेश ऋतुपर्ण, आकाश ठाकुर, जाकिर हुसैन रहबर, राजेंद्र वर्मा, ताज मोहम्मद सिद्दीकी, डॉ बीरेन्द्र प्रताप सिंह, शैलेन्द्र प्रताप सिंह, अविनाश प्रताप सिंह आदि समेत कई साहित्य्प्रेमी मौजूद थे।