किशोर बियानी ने पांच लाख लोगों को ढकेला भुखमरी के कगार पर

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छोटे व्यापारियों के बिलों का 2019 से भुगतान नहीं, 200 करोड़ रुपए बकाया

संवाददाता
मुंबई, भारत में मॉडर्न रिटेल के फादर कहे जाने वाले फ्यूचर ग्रुप के मालिक किशोर बियानी की धोखाधड़ी के कारण करीब पांच लाख लोग रोजगार गँवाकर भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं। इन लोगों का गुनाह बस इतना था कि वे लोग उन मध्य़म कंपनियों या व्यापारियों के साथ काम करते थे जिन कंपनियों ने फ्यूचर ग्रुप को कपड़े की आपूर्ति की थी।
ये छोटे व्यापार किशोर बियानी के फ्यूचर ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के ऑर्डर पर उन्हें कपड़े की आपूर्ति करते रहे हैं, लेकिन बियानी की कंपनियां 2019 से बिलों का भुगतान नहीं कर रही हैं, जिससे कपड़े की आपूर्ति करने वाली कंपनियां बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं। यह भुगतान बढ़ते-बढ़ते 200 करोड़ रुपए तक पहुंच गया और बियानी कान में तेल डाल कर बैठे हैं।

ऑल इंडिया गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड वेंडर्स एसोसिएशन (AIGMVA) ने बुधवार को मांग की कि फ्यूचर ग्रुप के मालिक किशोर बियानी को 2019 से लंबित 200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया चुकाना चाहिए। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल के लगभग 350 सदस्य वाले संगठन एआईजीएमवीए ने किशोर बियानी को बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहने पर सख़्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

ऑल इंडिया गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड वेंडर्स एसोसिएशन के परामर्शदादा और ट्रेड यूनियन ज्वाइंट एक्शन कमेटी (TUJAC) के संयोजक विश्वास उतागी ने एक बयान में कहा है कि उत्पादकों और आपूर्तिकर्ताओं ने 2019-2022 के बीच बियानी की कंपनियों के समूह के ऑर्डर के अनुसार कपड़ों की आपूर्ति की थी।

बकाया तुरंत भुगतान करने की मांग करते हुए श्री उतागी ने कहा, “प्रत्येक निर्माता-विक्रेता का 70 करोड़ रुपए से एक करोड़ रुपये से अधिक तक का बकाया है और ब्याज समेत कुल राशि लगभग 500 करोड़ रुपये हो गई है। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार और सभी संबंधित राज्य सरकारें भी इस मामले में हस्तक्षेप करें और इस बकाया राशि का भुगतान करवाने में मदद करें।”

ठाणे के एक कपड़ा निर्माता ने कहा कि फ्यूचर ग्रुप के आदेशों को पूरा करने के लिए अधिकांश व्यापारियों ने बैंक से ऋण लिया है, लेकिन चूंकि बियानी ने अपने बिलों का भुगतान नहीं किया, इसलिए अब बैंक निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं को बैंकों ने परेशान करना शुरू कर दिया है और व्यापारियों को ब्लैक लिस्टेड करके आगे ऋण देने से इनकार कर रही हैं।
श्री उतागी ने कहा, “बियानी की धोखेबाजी से एक लाख से अधिक लोग, उनके परिवारों और साथ साथ अन्य स्टाक होल्डर्स प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं और पांच लाख से अधिक लोग बेरोजगारी और भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं।” उन्होंने कहा कि फ्यूचर ग्रुप को पिछले साल रिलायंस ग्रुप को बेच दिया गया था और इस सौदे में भारतीय अर्थव्यवस्था, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के रीढ़ की हड्डी रहे व्यापारियों को अधर में छोड़ दिया गया है।

गुजरात के एक विक्रेता ने कहा कि उनका लाभ मार्जिन बहुत कम होता है, उनके पास कोई अतिरिक्त नकदी भी नहीं है और वे अपने आपूर्तिकर्ताओं, कर्मचारियों, स्थापना लागत, ईएमआई आदि के नियमित भुगतान के साथ नकद-ऋण सुविधा पर ही सरवाइव करते हैं। उन्होंने कहा, “फ्यूचर ग्रुप के कारण, हमारी 100 प्रतिशत कार्यशील पूंजी अवरुद्ध हो गई है, जो हमारे कारोबार को पूरी तरह से पंगु बना रही है, और अब बैंक वाले हमें ऋण का भुगतान न करने की नोटिस भेजकर परेशान कर रहे हैं। कर्ज से मुक्ति पाने के लिए कई सदस्यों ने परिवार का सोना, बचत या यहां तक कि अपने दुकानों या घरों को बेच दिया और अब बेघर हो गए हैं।”

एआईजीएमवीए और टीयूजेएसी ने विभिन्न राज्यों में फ्यूचर ग्रुप के खिलाफ मामले दर्ज करने की भी योजना बनाई है। दोनों संगठनों ने इस बारे में संसद सदस्यों और विधानमंडलों के सदस्यों को पत्र लिखकर अपनी दुर्दशा बताने का फैसला किया है, ताकि किशोर बियानी से पूरे बकाया का भुगतान करने एवं मामले को समाप्त करने के लिए दबाव डालने के लिए सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह कर सकें।