मन को व्यथित एव आंखों को आर्द्र कर गया ‘टिकटों का संग्रह’

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मुंबई, ‘वार विद द न्यूट्स’ जैसी अमर कृति देने वाले चेक गणराज्य के लेखक, नाटककार एवं आलोचक कारेल चापेक की कहानी ‘टिकटों का संग्रह’ के मंचन में रंगकर्मी दिनकर शर्मा बहुत सहज और सजीव अभिनय किया। उनके असाधारण अभिनय ने सामने बैठे दर्शकों के मन को व्यथित और आंखों को आर्द्र कर दिया। मंचन के बाद देर तक सभागृह में सन्नाटा पसरा रहा।

‘टिकटों का संग्रह’ के मंचन चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई के मृणालताई गोरे सभागृह, केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट, गोरेगांव में रविवार की शाम साप्ताहिक आयोजन में हुआ। मशहूर शायर-गीतकार देवमणि पांडेय के संचालन में हुए इस कार्यक्रम में आत्मीय संवाद भी हुए और बौद्धिक तबके के दर्शकों ने शेरो शायरी का भरपूर लुत्फ़ भी उठाया।

कार्यक्रम की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व प्रोफेसर डॉ रामबक्ष जाट की किताब ‘मेरी चिताणी’ से हुई। पुस्तक का परिचय देते हुए डॉ राम बक्ष ने अपने गांव चितौड़ी का जो जीवंत परिचय दिया। उन्होंने अपनी किताब का एक अंश पढ़कर सुनाया। उसमें गांव वालों की व्यवहार कुशलता और चतुराई का रोचक विवरण था। कुल मिलाकर इस किताब के ज़रिए राम बक्ष जी ने आत्मीय शैली में कथेतर गद्य का अद्भुत सृजन किया है। उनकी प्रस्तुति शानदार रही जो लोगों को बहुत अच्छी लगी।

इसके बाद कारेल चापेक की कहानी ‘टिकटों का संग्रह’ का मंचन झारखंड से पधारे रंगकर्मी दिनकर शर्मा ने किया। 30 मिनट की इस एकल प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वस्तुतः यह एकल पात्र की कहानी है। निर्मल वर्मा ने इसका हिंदी अनुवाद किया है। अपने बचपन की एक दुखद घटना की वजह से एक अधेड़ व्यक्ति अपनी पूरी ज़िंदगी गलतफ़हमी में काट देता है।

दरअसल, बचपन से टिकटों के संग्रह करने का शौक़ रखने वाला चंचल और महत्वाकांक्षी बच्चा अपनी इच्छा के विरूद्ध एक ऐसी ज़िंदगी चुन लेता है जिसमें न उत्साह है, न प्रसन्नता और न ही संवेदना। अचानक उस अधेड़ व्यक्ति के जीवन में फिर एक घटना घटती है और वह घटना उसे इस गलतफ़हमी से बाहर निकाल देती है। वह अपना अपराध स्वीकार करने (कॉनफेस) के लिए चर्च जाता है। इस प्रस्तुति में कुछ संवाद ऐसे थे जिन्होंने दर्शकों के मन को भिगो दिया। सबकी आंखें नम हो गईं।

दिल्ली से पधारे मशहूर शायर आदिल रशीद ‘टिकटों का संग्रह’ की अद्भुत प्रस्तुति से अभिभूत हो गए। उन्होंने दिनकर शर्मा की मुक्त कंठ से तारीफ़ की। आदिल ने अपनी कुछ चुनिंदा ग़ज़लों के अलावा एक मार्मिक नज़्म सुना कर श्रोताओं के दिल पर गहरी छाप छोड़ी। शायर नवीन जोशी नवा ने उका परिचय देते हुए उन्हें एक ट्रेंड सेटर शायर बताया था। आदिल ने अपने उस हुनर का भरपूर परिचय दिया। लखनऊ से पधारे शायर वीरेंद्र वत्स और गाज़ियाबाद से पधारे शायर नित्यानंद तुषार ने अपनी ग़ज़लें सुना कर कविता पाठ के सिलसिले को बड़ी ख़ूबसूरती से आगे बढ़ाया।

श्रोताओं से गुफ्तगू करते हुए मशहूर शायरा अभिनेत्री दीप्ति मिश्र ने दिल्ली से मुंबई तक अपनी जीवन यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए। उन्होंने कुछ चुनिंदा ग़ज़लों और नज़्मों के अलावा अपनी लोकप्रिय ग़ज़ल ‘है तो है’ सुनाई और उससे जुड़े कुछ रोचक प्रसंगों की जानकारी दी। दिल्ली में अपने संघर्ष की दास्तान सुनाते हुए दीप्ति मिश्र ने कहा कि अगर स्त्री के भीतर साहस, स्वाभिमान और आत्म सम्मान की भावना है तो वह कामयाबी की मंज़िल तक पहुंच जाती है। कई श्रोताओं ने सवाल किए और दीप्ति मिश्र ने बढ़िया जवाब दिए। कुल मिलाकर उनसे गुफ़्तगू का यह सिलसिला बहुत दिलचस्प और यादगार रहा।

कार्यक्रम में अभिनेत्री असीमा भट्ट, शायर नवीन चतुर्वेदी, शायर अश्वनी मित्तल, प्रदीप गुप्ता, डॉ उषा साहू, डॉ रोशनी किरण, रीमा राय सिंह, पूनम विश्वकर्मा, सविता दत्त, डॉ मधुबाला शुक्ला, नीलांजना किशोर और संगीतकार गायक रवि जैन मौजूद थे। कार्यक्रम के संयोजन में आकाश ठाकुर, गोविंद सिंह राजपूत, विशू और मनोहर जोशी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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