क्षमा बड़न को चाहिए…

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फॉरगिवनेस थेरेपी…

क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।
का रहीम हरी का घट्यो, जो भृगु मारी लात।।

ग़ुस्सा या उद्दंडता करने वाले व्यक्ति हमेशा छोटे कहे जाते हैं और क्षमा करने वाले लोग ही बड़े बनते हैं। महाकवि रहीम ने अपने इस दोहे में इसी भावना की व्याख्या की है। इसीलिए हिंदी में क्षमा के लिए अनगिनत शब्द और संबोधन गढ़े गए हैं। कहीं क्षमा को मानवता का मोती कहा गया है तो कहीं बड़प्पन। दुनिया के हर धर्म-संप्रदाय में क्षमा की महिमा बतलाई गई है। आधुनिक मेडिकल युग में क्षमा चिकित्सा थेरेपी के रूप में उभर चुका है। इसे कहते हैं, फॉरगिवनेस थेरेपी। इससे कई मानसिक रोगों का उपचार हो रहा है और लोग दर्द से छुटकारा पा रहे हैं। कहने का मतलब, इन दिनों क्षमा मेडिकल जगत में भी एक बहुत बड़े हथियार के रूप में सामने आ रहा है।

बड़प्पन है क्षमा

अगर आप किसी को उसकी हरकतों के बदले माफ़ कर देते हैं तो यह आपका बड़प्पन और भलमनसाहत माना जाता है। इससे आपको भी मानसिक सुकून मिलता है। हलकापन महसूस होता है। ऐसा लगता है, कोई बड़ा भार अचानक मन से उतर गया है। जैसे किसी बीमार को बीमारी से मुक्ति मिल जाए तो वह बहुत राहत महसूस करता है। ठीक उसी तरह क्षमा से क्षमा करने वाले को राहत मिलती है। इसीलिए इसे चिकित्सीय थैरेपी की प्रक्रिया के रूप में देखा गया है। तकनीकी बिंदु यह हैं कि क्षमा करने के बाद आप बहुत ख़ुश होते हैं। इससे आपके शरीर में रक्त प्रवाह तेज़ होता है, जिसका मेडिकल इंपैक्ट ह्यूमन बॉडी पर पड़ता है और दर्द या बीमारी से छुटकारा मिल जाता है।

सुकून की अनुभूति

2015 में मायो क्लिनिक में प्रकाशित रिसर्च में कहा गया है कि क्षमा यानी फ़ॉरगिवनेस सेहत के लिए फ़ायदेमंद तो होता ही है, इससे कई बीमारियों का सफल इलाज भी संभव है। रिसर्च में साबित हुआ है कि किसी के प्रति पूर्वाग्रह या द्वेष रखने का असर कार्डीओवैस्क्यलर यानी दिल की नलियों और नर्वस सिस्टम पर दिखता है। दरअसल, परसनल ग्रजेज़ यानी व्यक्तिगत पूर्वाग्रह रखने वालों का ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट्स तो बढ़ता ही है, इससे मस्कल टेंशन, अपने पर अंकुश रखने की भावना भी कम हो जाती है। जब हम आहत करने वाले को माफ़ करने की कल्पना करते हैं, तो सुकून भरी अनुभूति होती है और मन में पॉज़िटिविटी बढ़ती है। इससे मन तो बदलता ही है, मन का अवसाद भी ख़तम हो जाता है। एक दूसरे रिसर्च में भी कहा गया है कि माफ़ करने का मानव मन पर सकारात्मक असर पड़ता है जो सेहत के लिए रामबाण जैसा काम करता है।

स्वचिकित्सा पद्धति

माफ़ करने का यह मतलब नहीं कि जो कुछ हुआ है उसे भूल जाना, जाने देना या छोड़ देना। दरअसल, माफ़ करने का मतलब जो कुछ हुआ उसे स्वीकार करते हुए मन पर जो बोझ है, उसे हल्का करने की कोशिश करना। यह प्रक्रिया थोड़ी धीमी ज़रूर है, लेकिन वाकई है बेहद कारगर। यह महसूस करके निजात पाना है यानी खुद से ख़ुद का इलाज करके उबरना है। यह एक स्वचिकित्सा पद्धति भी है।

ग़ुस्सा एक मनोरोग

दरअसल, ज़िदगी के सफ़र में कई बार कुछ ऐसी घटनाएं हो जाती हैं, जो दिलोदिमाग़ पर गहरे पैठ कर जाती हैं। जब भी उस घटना की याद आती है, व्यक्ति आग-बबूला हो उठता है। उस घटना विशेष के लिए ज़िम्मेदार व्यक्ति के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा और मुखर हो उठता है। ऐसी हालत में ग़ुस्सा करने वाला व्यक्ति की हालत मनोरोगी जैसी हो जाती है। वह ख़ुशी के समय भी वहीं कटुता भरी घटना को याद करके अंदर ही अंदर दुखी होने लगता है। दरअसल, जब क्रोध आपके जीवन पर असर डालने लगे तो उससे मुक्त होना ज़रूरी है। मन की इस पीड़ा को मिटाने के लिए उस व्यक्ति को माफ़ कर देना सब्से अच्छी पॉलिसी है। इससे क्रोध से होने वाले मानसिक और दूसरे नुक़सान से बचा जा सकता है।

जॉन क्रिस्टॉफ अर्नोल्ड

मशहूर दार्शनिक लेखक जॉन क्रिस्टॉफ अर्नोल्ड ने अपनी चर्चित पुस्तक “व्हाई फॉरगिव” माफी के बारे में विस्तार से लिखा है। अर्नोल्ड भी क्रोध या बदले की भावना को धो डालने की नसीहत देते हैं। वह दावा भी करते हैं कि यह थेरेपी जब भी अपनाई जाती है, बहुत ज़्यादा कारगर साबित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार माफ़ करने का तरीक़ा यह है कि अमुक आदमी की निजी, पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों में ख़ुद को रखकर देखा जाए। उस हालत को जीकर देखें। इससे सब स्वाभाविक लगेगा। बेशक सामने वाले ने जो कष्ट दिए थे, वे कुछ हल्के लगेंगे। क्षमा का अर्थ है किसी के अपराध या ग़लती पर स्वेच्छा से उसके प्रति भेदभाव और क्रोध को समाप्त कर देना।

महात्मा गांधी क्षमा के पक्षधर

पिछली सदी में महात्मा गांधी देश को एक अलग राह दिखाने का प्रयास कर रहे थे- वह थी अहिंसा और क्षमा की राह। गांधीजी ने कहा था, “कमज़ोर लोग कभी क्षमा नहीं करते, क्षमा करना या भूलना मज़बूत लोगों की विशेषता है.” गांधीजी को जेल में डाला गया, सड़कों पर पीटा गया, कई लोगों ने उन्हें मारने की साज़िश रची, लेकिन उन्होंने सबको माफ़ कर दिया। जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद ब्रिगेडियर जनरल डायर घृणा का पात्र था, लेकिन गांधीजी ने न सिर्फ़ उसे क्षमा किया, बल्कि ‘डायरवाद’ के ख़िलाफ़ आगाह भी किया था। गांधी का कहना था, ‘जनरल डायर के काम आना और निर्दोष लोगों को मारने में उसकी मदद करना मेरे लिए पाप समान होगा। पर, यदि वह किसी रोग का शिकार है तो उसे वापस जीवन देना मेरे लिए क्षमा और प्यार का अभ्यास होगा।’ गांधी ने यहां तक लिखा कि डायर ने ‘मात्र कुछ शरीरों को नष्ट किया, पर कई लोगों ने एक राष्ट्र की आत्मा को मारने का प्रयास किया।’ उन्होंने कहा कि ‘जनरल डायर के लिए जो ग़ुस्सा जताया जा रहा है, मैं समझता हूं, काफी हद तक उसका लक्ष्य ग़लत है।’

कमरदर्द से भी राहत

शायद आपको यक़ीन न हो लेकिन यह सच है कि किसी को उसकी ग़लती के बदले माफ़ कर देने से बड़ी संख्या में लोगों को कमरदर्द, क्रोध और डिप्रेशन से राहत मिली है। ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की स्टडी के मुताबिक जिनकों लंबे समय से कमर दर्द था, उनमें से बड़ी संख्या में लोगों से कहा गया कि अगर किसी ने उनके साथ बुरा किया है तो उसे माफ़ कर दें। स्टडी के सूत्राधार ड्यूक यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के डिपार्टमेंट ऑफ़ सायकियाट्री के प्रोफेसर डॉ. कैरसन के मुताबिक ऐसा करने पर ढेर सारे लोगों के बताया कि उनका कमर दर्द तो कम हुआ ही है, उन्हें क्रोध और डिप्रेशन जैसी बीमारियों से भी मुक्त महसूस कर रहे हैं। इस स्टडी रिपोर्च को बाद में अटलांटा में क्षमा सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया।

लेखक – हरिगोविंद विश्वकर्मा