द मोस्ट वॉन्टेड डॉन – एपिसोड – 15 – प्रभादेवी पेट्रोल पंप पर दाऊद के बड़े भाई साबिर अहमद का मर्डर

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हरिगोविंद विश्वकर्मा
12 फरवरी 1981 की गुलाबी शाम थी वह। चौपाटी की रेत पर बैठे साबिर अहमद और चित्रा एक दूसरे की बांहों में खोए हुए थे। घर में किसी को बताए बिना साबिर कार की चाबी लेकर चुपपाच बाहर निकल गया था। जब चित्रा के चौखट पर पहुंचा तो महबूबा को सज-धजकर इंतज़ार करते हुए पाया। दोनों सीधे चौपाटी आ गए। भेलपुरी खाकर नरम रेत पर बैठ गए। बैठे-बैठे अचानक फ़िल्म देखने की योजना बन गई और पास के सिनेमा हॉल में घुस गए। फ़िल्म देखने के बाद होटल में खाना खाया। फिर बांद्रा फ़्लैट की ओर निकल पड़े। पेडर रोड के पास सहसा साबिर ने महसूस किया कि उसकी कार में ईंधन कम हो गया है। उसने सोचा, प्रभादेवी के पेट्रोल पंप पर ईंधन भरवा लेगा। चित्रा बग़ल बैठी थी। और साबिर तेज ड्राइव कर रहा था।

बहरहाल, बृहस्पतिवार की वह सर्द रात साबिर-चित्रा के लिए क़यामत की रात बन कर आई। पठान गिरोह के आमिरज़ादा, आलमज़ेब, ज़फ़र ज़माल सिद्दिकी और अन्य गुंडे पहले से सतर्क थे। उस समय का सबसे बेरहम हत्यारा मनोहर सुर्वे उर्फ मान्या भी उनके साथ था और ऑपरेशन को लीड कर रहा था। सिनेमा हॉल के सामने ही रेस्तरां में वे लोग पाव-भाजी खा रहे थे। साबिर-चित्रा को हॉल से निकल कर कार में बैठते देखकर उसके पीछे लग गए। उनकी अंबेसेडर कार फूलों से सजी थी। ऐसा लग रहा था कि उसमें नई-नई शादी के बाद दूल्हा-दुल्हन बैठे हुए हैं। हाजीअली के पास साबिर ने महसूस किया कि फूलों से सजी सुगंधित कार उसके पीछे बहुत दूर से चली आ रही है। बहरहाल, कार ओवरटेक करती हुई आगे निकल गई और वरली नाके के पास रुक गई। साबिर वहां पहुंचा और कार को पीछे छोड़ता हुआ आगे निकल गया। कार सिद्धिविनायक से पहले थोड़ी धीमी हो गई।

प्रभादेवी का सर्वो पेट्रोल पंप बस आने ही वाला था। तभी अचानक साबिर ने देखा कि फूलों से सजी वही कार फिर से उसके पीछे आ गई है और उसे लगातार फॉलो कर रही है। उसके समझ में कुछ नहीं आया। साबिर अब भी चौकन्ना नहीं हुआ। उसे लगा पठान गिरोह से तो पैचअप हो चुका है, अब कोई ख़तरा नहीं है। दरअसल, फूलों से सजी कार को पठान गिरोह का ममूर ख़ान ड्राइव कर रहा था। साबिर को खत्म करने का यह पूरा प्लान मान्या का था जिसे आज रात ही किसी भी कीमत पर एक्ज़िक्यूट किया जा रहा था।

रात के एक बजे चुके थे। साबिर अब भी बेपरवाह था। उसे लगा पीछे आ रही कार भी सबर्ब की ओर जा रही है। सिद्धिविनायक मंदिर के ठीक सामने पेट्रोल पंप की ओर मुड़ने के लिए उसने रफ़्तार और कम की ही थी कि अंबेसेडर उसके एकदम पीछे पहुंच गई। ड्राइवर ने बहुत ज़ोर से ब्रेक मारी जिससे तेज़ आवाज़ हुई और कार अचानक रुक गई। साबिर फ़ौरन ख़तरा भांप गया। चिल्लाकर चित्रा को भागने को कहा और गन की ओर हाथ बढ़ाया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। छह-छह सशस्त्र हमलावर चारो ओर से कार पर हमला बोल चुके थे। मान्या ने दरवाज़ा खोलकर चित्रा को बाहर खींचकर दूर कर दिया और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे। गोलियां कार की चेसिस और साबिर के बदन में घुसती चली गईं। उसके जिस्म में कुल नौ गोलियां थीं। इसके बावजूद वह मरा नहीं था। लिहाज़ा, मान्या ने गन फेंककर रामपुरी चाकू निकाली और पहले साबिर की कलाई, फिर उसका गला काट दिया। भल्ल से खून निकाल और दो-तीन मिनट में साबिर सिर कटे बकरे की तरह तड़पने के बाद सदा के लिए ठंडा पड़ गया। उसका निर्जीव जिस्म ख़ून से सराबोर था।

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साबिर देर रात तक जब घर नहीं पहुंचा तो दाऊद को चिंता होने लगी। ख़ालिद के साथ बैठक में बैठा वह भाई इंतज़ार कर रहा था। रात के क़रीब दो बज गए। ख़ालिद ने ही बताया कि साबिर शाम को ही कार लेकर बाहर निकल गया। तभी उन लोगों ने अप्रत्याशित रूप से बाहर गेट पर गोली चलने की आवाज़ सुनी। दरअसल, साबिर को ख़त्म करने के बाद मान्या, आमिरज़ादा और बाक़ी गुंडे दाऊद के घर चाल मुसाफ़िरखाना पहुंच गए थे। वे उसी समय दाऊद को भी ख़त्म चाहते थे। गेट को तोड़ने के लिए अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे।

ख़ालिद को लगा, गेट के पास कोई साबिर पर गोली चला रहा है। लिहाज़ा, गन लेकर वह नीचे भागा। उसने ग़ौर किया, कई लोग गेट पर बेतहाशा फ़ायरिंग कर रहे हैं। वह भी ओट लेकर गोलियां चलाने लगा। दोनों ओर से फ़ायरिंग होने से ख़ामोशी में पसरा पूरा इलाका अचानक गोलियों की आवाज़ से गूंज उठा। ख़ालिद की जवाबी फ़ायरिंग में आमिरज़ादा घायल हो गया। गोली उसकी टांग में लगी। वह नीचे गिर पड़ा। इसके बाद उसे लेकर हमलावर भाग खड़े हुए। दाऊद ख़ालिद के साथ गेट तक आया तो हमलावरों का नामोनिशान न था। उन्हें साबिर की बहुत चिंता हो रही थी। दाऊद को पूर्वानुमान होने लगा कि साबिर के साथ कुछ ठीक नहीं हुआ है। घर के किसी सदस्य को उसके बाद नींद नहीं आई।

सुबह-सबेरे साबिर से पहले उसके मौत की मनहूस ख़बर आ गई। पुलिस के हवलदार ने आकर बताया कि साबिर की प्रभादेवी पेट्रोल पंप पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसका शव जेजे अस्पताल के मुर्दाघर में रखा हुआ है। भाई की अकाल मौत दाऊद के लिए क़यामत बनकर आई। सुजाता की बेवफाई से भी उसे इतना सदमा नहीं लगा था जो साबिर की हत्या से लगा। कल्पना भी नहीं की थी कि पठान बंधु कुरान की कसम को ताक पर रख देंगे और उसके भाई को मार डालेंगे। उसका ख़ून खौल रहा था।

जब साबिर का शव अस्पताल से मुसाफ़िरखाना लाया गया तो माहौल ग़म और तनाव से भर गया। शाहनाज़ और अमीना दोनों की हालत ख़राब थी। इब्राहिम एकटक बेटे का छलनी शव देखे जा रहे थे। पता नहीं उनके मन में क्या चल रहा था। दाऊद किसी तरह अपने आंसुओं पर क़ाबू पाने की कोशिश कर रहा था। लोगों को यक़ीन ही न हुआ कि साबिर उनके बीच से सदा के लिए जा चुका है। उसकी हत्या की ख़बर फैलते ही पायधुनी, जेजे मार्ग, डोंगरी, तेली मोहल्ला, मुसाफ़िरखाना, बोरी मोहल्ला, भिंडी बाज़ार, मांडवी और आसपास के इलाक़े की सारी दुकाने बंद कर दी गईं। हर आदमी उनके घर की ओर लपका। दक्षिण मुंबई का क़रीब-क़रीब हर प्रमुख व्यक्ति हमदर्दी जताने पहुंचा। यहां तक कि हाजी मस्तान और बाशूदादा के साथ करीम लाला भी मुसाफ़िरखाना पहुंचा। वहां से मरीन लाइन्स के बाबा क़ब्रिस्तान तक के जनाजे में बहुत बड़ी तादाद में स्थानीय लोगों ने शिरकत की। बहरहाल, ग़म के उसी माहौल में साबिर को सुपुर्द-ए-ख़ाक कर दिया गया।

(The Most Wanted Don अगले भाग में जारी…)

अगला भाग पढ़ने के लिए क्लिक करें – द मोस्ट वॉन्टेड डॉन – एपिसोड – 16