आशातीत सफलता दिलाता है चमचासन!

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हरिगोविंद विश्वकर्मा

भारत प्राचीनकाल से दुनिया में विश्वगुरु रहा है। या कहें कि सभ्यता के आरंभ से ही भारत की धाक रही है। यहां की संस्कृति गौरवशाली रही है। मन को स्वस्थ रखने के लिए भारत के योग और आसन पूरी दुनिया में मशहूर रहे हैं। अब तो कुछ साल से 21 जून को योग दिवस भी मनाया जाने लगा है। भारत योगासन तक ही नहीं रुका। अब देश योगासन के आगे भी पहुंच गया है। जी हां, योग गुरुओं ने योगासन से भी महत्वपूर्ण मुद्रा खोज ली है। पिछले कुछ दशक से भारत में कुछ नए आसन बहुत तेज़ी से लोकप्रिय हुए हैं। इनमें सबसे अधिक लोकप्रिय हुआ है चमचासन। चमचासन इतना आसान है कि महज दो हफ़्ते के अभ्यास में कोई भी परिपक्व चमचे की तरह चमचासन कर सकता है।

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चमचासन तीन चरण में किया जाता है। पहले दो चरण खड़े होकर और तीसरा चरण बैठकर किया जाता है। पहला चरण आंख और चेहरे को अनुकूल करके चाटुकार बना देता है। दूसरा चरण रीढ़ को लचीला कर झुकने में माहिर कर देता है। और, तीसरा चरण पांव वाली मुद्रा घुटने टेक कर नाक रगड़ने में पारंगत कर देती है। तो आइए सबसे पहले चमचासन सीखने की विधि की चर्चा करते हैं। ताकि इच्छुक लोग चमचासन करके बेहतर और प्रशिक्षित चमचे बन सकें। चमचासन की ख़ूबियों से लाभान्वित हो सकें। जो लोग राजनीति या पत्रकारिता को करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए चमचासन सीखना अतिरिक्त योग्यता मानी जाती है।

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तो सबसे पहले पहले चरण में सीधे खड़े हो जाइए। आपकी नज़र सामने होनी चाहिए। आंखों में मक्कारी की मुद्रा लाइए। चेहरे पर कुटिलता के भाव होने चाहिए। फिर चेहरे की नसों को आहिस्ता-आहिस्ता से ढीला करते हुए कुटिलता को भोलेपन में बदलिए। कुछ सेकंड उसी मुद्रा में रहने के बाद भोलेपन को दीनता में परिवर्तित कीजिए। अंत में चेहरे पर खिस निपोरने जैसी मुद्रा दिखनी चाहिए। इसका भी ख़ूब अभ्यास करना चाहिए। इतना अभ्यास करना चाहिए कि आप खिस निपोरने में माहिर हो जाएं। आप एक बार खिस निपोरने में माहिर हो गए तो सफल चमचा बनने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती। खिस निपोरना एक तरह का समर्पण है।

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दूसरे चरण में आप अपनी आंखों में मौजूद मक्कारी की मुद्रा को धीरे से मासूमियत में बदलिए। कुछ सेकंड उसी मुद्रा में रहने के बाद आंखों की मासूमियत को समर्पण वाली मुद्रा में तब्दील कर दीजिए। अंत में समर्पण को चाटुकारिता में परिवर्तित कीजिए। इसके बाद नज़र को धीरे-धीरे नीचे लाइए। पांवों को सीधा रखते हुए आगे की ओर झुकिए। जितना झुक सकें उतना झुकिए। कुछ सेकंड उसी मुद्रा में रहकर धीरे-धीरे पहले वाली मुद्रा में आ जाइए। इसका अभ्यास दस बार करिए। इससे आपकी रीढ़ बहुत अधिक लचीली हो जाएगी। लचीली रीढ़ से झुकने में होने वाली असुविधा दूर हो जाता है। इससे आपको अपनी रीढ़ अस्थिविहीन महसूस होगी और आप जब चाहे तब केंचुए की तरह विनीत हो सकते हैं। इसके अभ्यास से आप अपने अंदर के स्वाभिमान को हमेशा के लिए ख़त्म कर सकते हैं।

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तीसरे चरण में टांगों को सीधा रख कर धीरे-धीरे झुकिए। फिर घुटने के बल बैठ जाइए। घुटने के बल बैठने के बाद चेहरे को आगे लाएं और नाक से फ़र्श से हल्के से स्पर्श करें। उसी मुद्रा में दस सेकंड रहें। उसके बाद नाक से फ़र्श पर रगड़ें। यह क्रिया तब तक करें जब तक नाक में दर्द न होने लगे। आरंभ में नाक रगड़ने में दर्द के साथ असुविधा भी होती है। लेकिन ऐसा महसूस हो तो लंबी-लंबी सांस लें। थोड़ी देर बाद उस क्रिया को पुनः दोहराएं। विशेषज्ञों का मानना है कि नाक की त्वचा संवेदनशील होती है। आरंभ में नाक रगड़ने में असुविधा होती है। लेकिन लगातार अभ्यास से आप नाक रगड़ने में सिद्धहस्त हो सकते हैं। साथ ही साथ आपके अंदर की संवेदना मर जाएगी। संवेदना के मरते ही उच्च कोटि का चमचा आप पर हावी हो जाएगा और यह आपके लिए तरक़्क़ी के दरवाज़े खोल देगा।

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चमचासन करने से आप अंदर का स्वाभिमान और संवेदना मर जाती है। इसके बाद आप दूसरों के सामने खिस निपोर सकते हैं। चाटुकारिता कर सकते हैं। तलवे चाट सकते हैं। इसीलिए चमचासन करने सीखने वाला सुयोग्य चमचा बनकर आशातीत सफलता हासिल करता है। यह गुण आपको राजनीति और पत्रकारिता में शिखर पर ले जा सकता है। आज के दौर में चमचासन सफलता की गारंटी है। चमचासन सीखने के बाद बिना परिश्रम के काम, नौकरी, इनक्रीमेंट, प्रमोशन मिल सकता है।

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