सुशांत की आत्महत्या से हिल गईं सुष्मिता, डिप्रेशन पर लिखा इमोशनल नोट

1
548

जब से अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) ने ख़ुदकुशी की है, तभी से बॉलीवुड के कई सेलेब्रेटीज़ अपने डिप्रेशन के बारे में खुलकर बात करने लगे हैं। इससे मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं के महत्व पर हर तरफ चर्चा हो रही है। इसी क्रम में अभिनेत्री सुष्मिता सेन (Sushmita Sen) ने भी मेंटल हेल्थ पर अपने इंटाग्राम (Instagram) अकॉउंट पर एक बेहद इमोशनल पोस्ट (Emotional Post) को शेयर किया है।

सुष्मिता कहती हैं, “आप जिसे प्यार करते हैं या जिसके करीब हैं, उसे पूरी तरह से जानिए। ज़िंदगी उतार-चढ़ाव से भरी होती है। बस हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। जैसे हम दूसरे टॉपिक्स पर बातें करते हैं, वैसे ही हमें मेंटल हेल्थ पर भी खुलकर बोलना चाहिए। सुशांत और उन जैसे अन्य युवा हमें बताने की कोशिश कर रहे हैं कि हमें दूसरे लोगों को दोष देना शुरू करने से पहले अपनी चीजों की जिम्मेदारी लेनी होगी। जब मैंने यूट्यूब चैनल शुरू किया तो हर कोई चाहता था कि मैं मेंटल हेल्थ पर बोलूं। मैं भी सोचती रही कि ठीक है मैं मेंटल हेल्थ पर कुछ करूंगी। मैंने तय किया कि ब्लॉग लिखूंगी, लेकिन शुरू नहीं कर पाई, लेकिन जब मैंने सुशांत की खबर सुनी, तो मैंने बस लगातार लिखना शुरू कर दिया है।”

रियल इमोशन है डिप्रेशन

बॉलीवुड (Bollywood) अभिनेत्री ने आगे लिखा है, “मैंने भी बहुत डिप्रेशन (Depression) झेला है। मुझे अच्छी तरह से पता है, यह बहुत रियल इमोशन होता है। उस वक्त हंसना बहुत ही मुश्किल हो जाता है, फिर भी हमें मौत और जीवन में से किसी एक को चुनना पड़ता है, हम जीवन को चुनते हैं, लिहाज़ा, हमें जीना पड़ता और हमें जीना भी चाहिए। हर इंसान अलग होता है। प्रतिदिन उससे निकलने की कोशिश करनी चाहिए। यादें रखें कि आप अकेले नहीं हैं। हम सभी के अंदर कोई न कोई तकलीफ़ है, जो हमें डिप्रेशन की ओर ले जाता है, फिर चाहे क्लीनिकल (Clinical) हो या ज़िंदगी के रास्ते आपको उस मोड़ तक ले आते हैं। मैं उस दर्द को बांटना चाह रही थी। हम सबकी ज़िंदगी में अलग-अलग तरह की समस्याएं हैं। हमें उससे हार नहीं माननी चाहिए। ये भी सच है कि हर इंसान अलग होता है। कुछ लोगों को दोस्तों और परिवार के सपोर्ट की ज़रूरत होती है, तो कुछ डॉक्टर या मानसिक चिकित्सक के पास जाकर बेहतर महसूस करते हैं। बस आपको किसी भी हाल में अपनी ज़िंदगी का उद्देश्य नहीं भूलना चाहिए। मेरी ज़िंदगी के कई उद्देश्य हैं। मेरी दो बेटियां हैं, जिनका उनका पालन पोषण मैं अकेले कर रही हूं। मैं सिंगल मदर (Single Mother) हूं। तो मैं सोच भी नहीं सकती कि ज़िंदगी खत्म हो गई।”

पड़ती है मदद की ज़रूरत

अपना अनुभव शेयर करते हुए सुष्मिता ने आगे कहती हैं, “मुझे जब भी लगता कि मेरा डिप्रेशन बढ़ रहा है तो मैं सीधे डॉक्टर के पास जाती थी। ट्रीटमेंट (Treatment) के बारे में पूछती थी। अगर आपका मन नहीं अच्छा है, आपको रोना आ रहा है, पीड़ा या तकलीफ़ हो रही है तो इसका मतलब है कि आपको मेडिकल हेल्प (medical Help) की ज़रूरत है, मुझे जब भी ऐसा लगा, तो मैंने अपने डॉक्टर से कंसल्ट किया। क्योंकि मैं जानती हूँ कि मैं ख़ुश रहने वाली इंसान हूं। अगर मुझे रोने का मन कर रहा है, तो मतलब मेरा मन ठीक नहीं है और मुझे मदद की ज़रूरत है। कई बार मेडिटेशन (Meditation) और मनोचिकित्सक (Psychiatrist) ये दोनों आपको ठीक कर देते हैं। आपके पास हारने का विकल्प नहीं होता है। मेरे पास भी नहीं था। मुझे ज़िंदगी में बहुत कुछ अकेले दम पर करना पड़ा है। मुझे अकेलेपन से डर नहीं लगता। इसलिए मैं एक ही बात सोचती हूं मुझे ठीक होना ही है।”

रील और रियल लाइफ़

पूर्व मिस यूनिवर्स (Miss Universe) ने आगे कहा है- ख़ूबसूरत और अच्छा दिखो। अच्छा दिखाओ और हर समय अच्छी रहो, यही अप्रोच रील और रियल लाइफ़ (Real Life) को एक जैसा बनाता है। ऑन स्क्रीन (Screen) और ऑफ स्क्रीन का प्रोजेक्शन बन जाता है। कई बार शोहरत मिलने के साथ, बैंक बैलेंस (Bank Balance) बढ़ने के साथ असुरक्षा भी बढ़ती है। ये सभी एक्टर की ज़िंदगी में ट्रिगर (Trigger) के रूप में जाना जा सकता है, लेकिन वास्तव में ये हम सभी की ज़िंदगी की सच्चाई है। आपको जो भी तकलीफ़ में है, बस सिर्फ़ एक बात का ख़याल रखें कि आपको बहुत से लोग प्यार करते हैं। आपकी ज़िंदगी बहुत कीमती है और आपकी खुशियां भी। अपनी खुशियों की ज़िम्मेदारी हमारी अपनी है और हमें उस ज़िम्मेदारी से भागना नहीं चाहिए। तकलीफ़ चाहे जितनी बड़ी हो, बस गुज़र जाएगी। ये ज़िंदगी ख़ूबसरत तोहफ़ा है, न जाने कितनी संभावनाएं, न जाने कितने ख़्वाब हैं इसमें। इसलिए कभी हार मत मानें। अभी तो न जाने कितने अमेजिंग मोमेंट्स (Amazing moments) भी जीने हैं हमें। इसलिए बस आगे बढ़ते रहिए।”

इसे भी पढ़े – क्या अंकिता को कभी भूल ही नहीं पाए थे सुशांत?

संकोच मत करिए

सुष्मिता कहती हैं, “अक्सर हम अपने मन की बात संकोच वश नहीं कह पाते। सोचते हैं, कैसे कहें? कोई क्या सोचेगा? लोग क्या कहेंगे? मुझे लगता है हम अपने दर्द को छिपाने में एक्सपर्ट हो गए हैं। या फिर किसी के पास इतना समय नहीं है कि वो हमारे दर्द को समझे, सुने या महसूस करे। हर किसी की ज़िंदगी मे अनगिनत प्रेशर (Pressure) है। उतार चढ़ाव हैं, लेकिन हमें हमेशा लड़ना चाहिए, कभी हार नहीं माननी चाहिए। अगर आप थक रहे हैं तो आराम करना सीखिए, क्विट (Quite) करना नहीं। हम दुनिया नहीं बदल सकते, लेकिन अपने विचारों को बदल सकते हैं। ईश्वर पर यकीन करिए। हम अपनी ज़िंदगी में खुशियां खुद ला सकते हैं, इसलिए कभी हार मत मानिए। संघर्ष करते रहिए। जीवन में कभी भी हार न मानिए। अंत तक लड़ते रहिए। ज़रूरत पड़ने पर हमेशा मदद लेने के लिए तैयार रहिए।” उन्होंने अपनी पोस्ट के साथ एक फोटो भी शेयर की, जिसमें लिखा था, ‘प्रोटेक्ट योर पीस (Protect Your Peace)’ यानि कि अपनी शांति की रक्षा करो।

सुशांत बेहद प्रतिभाशाली कलाकार

पूर्व मिस यूनिवर्स आगे कहती हैं, “बहुत कम समय में शोहरत हासिल करने वाले सुशांत बेहद प्रतिभाशाली (talented) कलाकार थे। मैं उन्हें पर्सनली नहीं जानती थी। काश मैं उनसे मिली होती। मैं उनके अभिनय की मुरीद रही हूं। मुझे उनकी मौत की खबर सुनकर सदमा लगा। जब उनके निधन की खबर आई तो मुझसे रहा नहीं गया। यह सिर्फ एक सुशांत या एक कलाकार का सच नहीं है। बहुत सारे ऐसे लोग ऐसे मानसिक दौर से गुजर रहे हैं जिनकी आवाज हम तक पहुंच नहीं रही है। कलाकार के लिए अपनी बात को कहना और दिखाना काफी मुश्किल होता है, अगर आप अपनी यह आवाज़ को दबाकर रखते हैं। यह भी सच है कि कई बार लोग आपकी कही बातों का मज़ाक़ उड़ाने लगते हैं। मेरा मानना है कि तब भी आपको अपना सच बोलना चाहिए। आपको मेडिकल या इमोशनल मदद मांगनी चाहिए।”

आर्या से कमबैक

ख़ुद लंबे समय तक डिप्रेशन की शिकार रहीं सुष्मिता बहुत लंबे समय बाद वेब सीरीज ‘आर्या (Aarya)’ से कमबैक कर रही हैं। आर्या में उनके अभिनय की जमकर तारीफ हो रही है। इससे पहले सुष्मिता 2015 में रिलीज बंगाली फिल्म ‘निर्बाक (Nirbak)’ में रूपहले परदे पर नज़र आई थीं। बॉलीवुड की फिल्म में सुष्मिता दस साल पहले नजर आई थी। उनकी फिल्म ‘नो प्रॉब्लम (No Problem)’ 2010 में रिलीज हुई थी। सुष्मिता ने स्वीकार किया है कि पिछले 10 साल भी उनके लिए मुश्किल भरे रहे, लेकिन उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारीं। वो ज़िंदगी से लड़ती रहीं और समस्याओं को परास्त करती रहीं।

1 COMMENT