अमृत से कम नहीं गाय का दूध

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भारत में देसी गाय का दूध बेहद पौष्टिक और सेहतवर्धक माना जाता है। इसे संपूर्ण आहार भी कहा जाता है। कोई भी व्यक्ति केवल गाय का दूध पीकर कई दिन स्वस्थ और अपने शरीर की ऊर्जा को बनाए रख सकता है। गाय का दूध शरीर के लिए ज़रूरी हर पौष्टिक तत्व की सप्लाई करता है यानी इसे पीने से शरीर में किसी ज़रूरी तत्व की कमीं भी नहीं पड़ती है। आइए जानते हैं गाय के दूध के बारे में।

मानव बुद्धि के विकास में गाय के दूध का अहम रोल रहा है। यह सर्वोतम भोजन और दवा दोनों है। हर किसी को गाय का दूध ज़रूर पीना चाहिए, क्योंकि ये इतना हल्का होता है कि कमज़ोर आदमी भी इसे आसानी से पचा सकता है। गाय के दूध के आश्चर्यजनक लाभ देखकर कई लोगों ने घर में ही गाय पालना शुरू कर दिया है। मरीज़ों के लिए गाय का दूध श्रेष्ठ खुराक है। हाल ही में आए एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक़, गाय के दूध के अनगिनत हेल्थ बेनीफिट्स हैं। नियमित रूप से गाय का दूध पीने वाले कभी बीमार नहीं पड़ते। कई रोग तो केवल गाय का दूध पीकर दूर किए जा सकते हैं।

गाय का दूध जीवनोपयोगी
दुबले-पतले लोगों को मलाईदार दूध और मोटे लोगों को मक्खन निकले हुए दूध का सेवन करना चाहिए। गाय का केवल आधा किलो दूध अपने विशेष गुणों के चलते एक पाव मांस और तीन अंडों से ज़्यादा पौष्टिक तत्वों को अपने अंदर समेटे रहता है। इसीलिए इस दूध को बहुत जीवनोपयोगी माना जाता है। गाय का दूध अत्यंत स्वादिष्ट, स्निग्ध, मुलायम, चिकना, मधुर, शीतल, रुचिकर, बुद्धिवर्धक, बलवर्धक, स्मृतिवर्धक, जीवनदायी और सभी रोगों का नाश करने वाला होता है।

देसी गाय में दूध कम
भारत में कई तरह की गायें पाई जाती हैं, जिनमे देसी गायें और विदेशी गायें शामिल होती हैं। देसी गाय विदेशी गाय के मुक़ाबले कम दूध देती है, लेकिन उसका दूध विदेशी गाय के मुक़ाबले ज़्यादा पौष्टिक होता है। इसीलिए देसी गाय पूजनीय मानी जाती हैं। हिंदू धार्मिक परंपरा के अनुसार, देसी गाय जानवर नहीं बल्कि मातातुल्य मानी है, जहां देवी-देवताओं का निवास होता है। सबसे अहम् देसी गाय के दूध के साथ-साथ उसका मूत्र और गोबर भी उपयोगी होता है।

गाय के दूध में शुद्ध सोना
कहा जाता है कि गाय की रीढ़ की हड्डी में सूर्यकेतु नाड़ी होती है। सूरज की किरणें जब गाय के शरीर को स्पर्श करती हैं, तब सूर्यकेतु नाड़ी सूर्य की किरणों से सोना बनाती है। इसीलिए गाय के दूध और मक्खन में पीलापन होता है। इस पीलेपन में ज़हरनाशक तत्व होते हैं। गाय का दूध पीने से शुद्ध सोना शरीर में जाता है। इसीलिए, ज़हरीले सांप के काट लेने पर मरीज़ को गाय का घी पिलाया जाता है। इससे सांप का ज़हर बेअसर हो जाता है। जीवनभर गाय का दूध-पीने वाले व्यक्ति कैंसर जैसे भयानक रोगों से बचे रहते हैं।

पौष्टिक तत्व की भरमार
मेडिकल साइंस में साबित हो चुका है कि गाय के दूध में भरपूर पौष्टिक तत्व होते हैं। सामान्य तौर पर, इसमें 85 फ़ीसदी जल होता है और 8 तरह के प्रोटीन्स, विटामिन सी2, विटामिन ए (आईक्यू) 174 और विटामिन डी5 समेत 6 तरह के विटामिन्स, 21 तरह के एमीनो एसिड, 11 तरह के फैटी एसिड, 25 तरह के मिनरल्स, 16 तरह के नाइट्रोजन कंपाउंड 4 तरह के फास्फोरस कंपाउंड, 2 तरह के शुगर और गोल्ड, कॉपर, आयरन, सल्फर, कैल्शियम, आयोडीन, फ्लोरिन और सिलकॉन जैसे दूसरे पौष्टिक तत्व होते हैं। इसके अलावा इसमें कई एंज़ाइम और कुछ लाइव ब्लड सेल्स भी होती हैं। गाय के दूध में प्रति ग्राम 3।14 मिली ग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है।

आख़िर दूध सफ़ेद क्यों?
अक्सर लोग हैरान होते हैं कि गाय के दूध का रंग आख़िरकार सफ़ेद क्यों होता है? दरअसल यह सफ़ेदी दूध में मौजूद ‘केसीन’ नाम का प्रोटीन की वजह से होती है। पौष्टिक कैल्शियम से भरपूर केसीन के कारण दूध सफ़ेद दिखता है। दूध में क्रीम या मलाई भी उसे सफ़ेद रंग दे देती है। बिना मलाई के दूध का रंग सफ़ेद की बजाय स्लेटी नज़र आने लगता है। दूध के सफ़ेद होने का एक और कारण है। केसीन प्रोटीन प्रकाश को पूर्ण रूप से परावर्तित करता है, इसलिए दूध सफ़ेद दिखता है। दूध के सबसे पौष्टिक तत्व हैं कैल्शियम और विटामिन डी कैल्शियम हड्डियों और दांतों को मज़बूत बनाते हैं और विटामिन डी कैल्शियम सोखने में मदद करता है।

दूध पीने का समय
विशेष परिस्थितियों तो छोड़ दिया जाए तो आमतौर पर दूध प्रायः सुबह के समय पीते हैं। अगर संभव हो तो ताज़ा दूध ही पीना चाहिए। दूध सूर्य की गर्मी से पचता है। लिहाज़ा, इसे रात में पीने से बचना चाहिए। दूध सोने से तीन घंटे पहले पी लेना चाहिए। पीने के फ़ौरन बाद कभी नहीं सोना चाहिए। दूध गर्म इतना ही करें, जितना गर्म आराम से पी सकें। ज़्यादा उबालने से पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं। दूध का सेवन करते समय किसी प्रकार का खट्टा पदार्थ न लें।

गाय के दूध के औषधीय गुण

ऑस्टियोपोरोसिस
आधुनिक जीवनशैली, धूम्रपान, जंकफूड, विटामिन डी की कमी से हड्डियां कमज़ोर हो जाती हैं और पता भी नहीं चलता। इस रोग को ही ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों का नरम होना कहते हैं।। यह बड़ी तेज़ी से फैल रहा है। रोज़ाना 20 मिनट धूप और एक ग्लास दूध पीने से हड्डियां मज़बूत होती हैं। एक ग्लास चिकनाई रहित दूध में 300 मिलीग्राम कैल्शियम होता है। बीमारी से बचने के लिए नित्य एक हज़ार मिलीग्राम कैल्शियम शरीर को मिलना चाहिए।

कैंसर
गाय का दूध कैंसर रोगियों की लिए रामबाण दवा की तरह है। अमेरिका की कार्नेल यूनिवर्सिटी के डॉ। डेल बाऊमैन ने गाय के दूध में कैंसर निरोधक तत्व सीएलए पाए जाने की पुष्टि की है। सीएलए रसायन कोलन, प्रोस्टेट, गर्भाशय एवं स्तन कैंसर को रोकने में मददगार होते हैं। गाय के दूध में इस रसायन के होने से यह कैंसर निरोध का सुलभ स्रोत है। कैंसर के रोगियों को गाय का दूध खूब पीना चाहिए।

सौंदर्य
गाय का दूध बीमारियों के साथ-साथ चेहरे की सुंदरता को भी निखारता है। गाय के दूध में मसूर की दाल और बेसन को भिगोकर रात भर रख दें। सुबह इन्हें पीसकर पेस्ट बना लें। चेहरे पर रोज़ाना लगाने से मुंहासे, चेचक के दाग़, चेहरे के बाल और झाइयां ख़त्म हो जाती हैं। गाय का दूध पीने से असमय आने वाला बुढ़ापा दूर होता है और यौवन लौट आता है।

हृदय रोग
दूध में मौजूद पौष्टिक तत्व दिल के लिए संजीवनी बूटी का काम करते हैं। इसीलिए जो लोग नियमित रूप से गाय के दूध का सेवन करते हैं उन्हें स्ट्रोक की संभावना बहुत कम होती है। कुछ दिन पहले हुए एक रिसर्च के मुताबिक़, पिछले 28 साल में चार लाख एडल्ट्स पर किए गए सर्वे में पाया कि जो लोग ज़्यादा दूध पीते हैं उन्हें हृदय संबंधी अटैक या स्ट्रॉक की संभावना 17 फ़ीसदी तक कम हो गई।

नेत्र रोग
ऑखों में चोट लगी हो, जल गई हो, मिर्च-मसाला गिरा हो, कोई कीड़ा गिर गया हो या डंक मार दिया हो, आंख लाल हो, दुखती हो, कीचड़ आती हो, प्रकाश सहन न होता हो तो रूई का फाहा दूध में भिगोकर ऑखों पर रखने से राहत मिलती है। रात भर फाहा बंधा रखें तो ज़्यादा लाभ होता है। दो बूंद दूध की आंख में भी डाल लेनी चाहिए।

माइग्रेन
गाय का दूध माइग्रेन से परेशान लोगों के लिए बड़ा फ़ायदेमंद होता है। माइग्रेन सूर्य के साथ घटता-बढ़ता हो तो सूर्योदय के पहले गर्म दूध के साथ जलेबी या रबड़ी खाएं। 250 ग्राम दूध में स्वाद के अनुसार शक्कर डालकर उबाल लें। फिर दो चम्मच देशी घी डालकर सूर्योदय से पहले पी लें। कुछ दिन यह नुस्ख़ा आजमाने से माइग्रेन का दर्द ठीक हो जाएगा।

अपच
गाय का दूध पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। गरिष्ठ भोजन खाने से पेट ख़राब हो जाता है। अपच हो जाती है। एक गिलास दूध, आधा ग्लास पानी और शक्कर मिलाकर उबाल लें। फिर उसे गर्म-गर्म पीएं। चार घंटे बाद फिर इसी प्रकार दूध बनाकर पीएं। खाना नहीं खाएं। प्यास लगने पर गर्म पानी पीएं। गरिष्ठ भोजन से उत्पन्न सारी अपच ठीक हो जाएगी।

वियाग्रा से कम नहीं दूध

जो लोग सेक्स में कमज़ोर हैं उन्हें नियमित रूप से दूध पीना चाहिए, क्योंकि मेडिकल साइंस के रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि तीन माह तक लगातार रात में दूध पीने से स्त्री और पुरुषों दोनों की यौन-इच्छा और काम-शक्ति के साथ-साथ यौन-क्रिया की अवधि में भारी वृद्धि हो जाती है। वीर्य बढ़ाने के लिए सुबह नाश्ते में केला, दस ग्राम देशी घी के साथ खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। दोपहर में दो केले, 25 ग्राम खजूर, एक चम्मच देशी घी खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। दूध में शहद मिलाकर पीने से भी वीर्य बढ़ता है। मर्दाना शक्ति बढ़ाने के लिए गर्म दूध में एक चम्मच घी मिलाकर नित्य सोते समय पीएं। इससे उन्माद में भी लाभ होता है। इसी तरह दो छुहारे रोज़ाना दूध में उबालकर खाने और दूध पीने से शुक्रों की संख्या बढ़ जाती है।

लेख – हरिगोविंद विश्वकर्मा