पुस्तक समीक्षा – क्या है जो मेरा है

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कवि राजेश ऋतुपर्ण के काव्य संग्रह का नाम है – ‘क्या है जो मेरा है’। संग्रह की पहली कविता में ही राजेश ने अपने सृजन सरोकार को अभिव्यक्त कर दिया है- जो अच्छा है, श्रेष्ठ है, उसे किसी के नाम कर दिया जाए और ख़ालीपन को अपने पास रख लिया जाए।
इंसान का अंतर्मन जब अनुभव, अध्ययन और अवलोकन की पूंजी से आच्छादित होता है तो वह काव्यात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से छलक पड़ता है। रचनात्मकता के इस उत्स को इंसान अपनी दृष्टि से समृद्ध करता है। राजेश ने अपने अनुभव के आकाश को और अपने पैरों तले ज़मीन के एहसास को अपनी रचनात्मकता का आधार बनाया है। उनकी अभिव्यक्ति में वह विकलता मौजूद है जो सृजनात्मकता के लिए ज़रूरी है। ‘पोशाक‘ कविता की कुछ पंक्तियां देखिए-
काश! बिना टूटे- बिना गांठ पड़े
ये धागे अपनी तकली पर फिर से चढ़ जाएं
ताकि फिर से कुछ नया बुनें
हम और तुम…
मौजूदा समय के कुछ महत्वपूर्ण यथार्थ होते हैं। एक कवि के लिए यह चुनौती होती है कि वह ऐसे यथार्थ को अपनी रचनात्मकता के दायरे में कैसे लाए। हमारे समय का एक महत्वपूर्ण यथार्थ है ‘कटना’। जंगल से लेकर जानवर तक कट रहे हैं। इस यथार्थ को अभिव्यक्त करते हुए कवि अपने समय से ख़ुद को जोड़ता है। इस कविता की कुछ पंक्तियां देखिए –
इंसान सब कुछ खा पचा जाता है
फिर काटता है समय …
फिर भी समय नहीं कटता
हां इस बीच कट चुके होते हैं
कई पेड़, कई पौधे
कई फल, कई फूल
बहुत सारे जानवर
और थोड़े थोड़े हम
किसी घटना पर तात्कालिक टिप्पणी से बचते हुए अपने समय के किसी ज्वलंत सवाल को काव्यात्मक संवेदना के साथ जोड़कर अभिव्यक्त करना बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी और कौशल का काम होता है। राजेश कहीं-कहीं यह जोख़िम उठाते हैं। लॉकडाउन में मज़दूरों की पैदल घर वापसी एक ज्वलंत सवाल था। राजेश की ‘लॉकडाउन’ कविता में ‘एक कवि का शर्मनामा’ देखिए-
मैं चुपचाप देखता हूं
टेलीविज़न पर आ रही पलायन की ख़बरों को
मैं चुपचाप गणना करता हूं कि
सड़क पर चलता हुआ मज़दूर
अब तक कितनी दूर चल चुका होगा
क्या वो अपने घर पहुंचेगा
सोचते-सोचते
मैं क़लम का सिपाही
थक कर सो जाता हूं
उठता हूं तो मुझे शर्म आती है
मुझे मज़दूरों पर कविता लिखने में
शर्म आती है …
राजेश ऋतुपर्ण के पास सोच और सरोकार है। ज़िंदगी और समाज के प्रति एक स्वस्थ नज़रिया है। इसलिए जब वे अपने आसपास की दुनिया के कथ्य को अपनी संवेदना के साथ पेश करते हैं तो एक सुंदर कविता बन जाती है। राजेश के पास अभिव्यक्ति के लिए जीवंत भाषा है। ख़ूबसूरत अंदाज़ है। इसलिए उनकी कविताएं पाठकों के साथ एक आत्मीय रिश्ता क़ायम कर लेती हैं। ‘क्या है जो मेरा है’ राजेश ऋतुपर्ण का पहला काव्य संकलन है। मुझे उम्मीद है कि रचनाकार जगत में और काव्य प्रेमियों के बीच में इसका भरपूर स्वागत होगा। इस रचनात्मक उपलब्धि के लिए राजेश ऋतुपर्ण को हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं।
(लेखक नामचीन शायर और गीतकार हैं। सम्पर्क : बी-103, दिव्य स्तुति, कन्या पाडा, गोकुलधाम, फिल्मसिटी रोड, गोरेगांव पूर्व, मुम्बई-400063 98210 82126)