सूफी या भक्ति संगीत दिलों को दिल से जोड़ता है – पूनम विश्वकर्मा

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शुक्रवार की शाम  सुल्तानपुर के लंभुआ में हुई दर्शन यात्रा

संवाददाता
सुल्तानपुर। गीतकारा-गायिका पूनम विश्वकर्मा का मानना है कि दुनिया में संगीत एक मात्र ऐसी विधा है जो इंसान के बीच की सारी दूरियों, सारे मतभेद और सारे गिले-शिकवे को मिटा देता है और संगीत में अगर भक्ति संगीत यानी भजन के रूप में हो तो उसका असर और अधिक होता है। सूफी संगीत या भजन इंसान के मन के अंदर में अहं रूपी मैल को साफ कर देता है। इंसान के हृदय को पवित्र करता है और उसकी तबियत में प्यार, सद्भाव और सहानुभित का बीजरोपण करता है।

पूनम विश्वकर्मा ने कहा कि सूफी या भक्ति संगीत इंसान को यह सीख देता है कि छोटे से जीवन को मतभेद और शत्रुता से नहीं प्यार और मित्रता के साथ गुजारा जाए। यह भजन या सूफी संगीत की ताकत है कि उसे सब लोग मिल बैठ कर सुनते हैं। इसीलिए समाज की एकता और एकजुटता के लिए मैंने भजनों को ही माध्यम बनाया है। यह विचार गीतकारा-गायिका पूनम विश्वकर्मा ने शुकवार की शाम सुल्तानपुर के लंभुआ कस्बे में अपनी दर्शन यात्रा के दौरान व्यक्त किया।

फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय पूनम विश्वकर्मा समाज को एकजुट करने और लोगों में भाई-चारे का संदेश देने के लिए 2021 से हर महीने की अमावस्या को दर्शन यात्रा करती आ रही हैं। शुकवार की शाम सुल्तानपुर के लंभुआ में स्थित श्री शिवदुर्गा विश्वकर्मा मंदिर में आयोजित की गई। जिसमें बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित हुए। कार्यक्रम में पूनम विश्वकर्मा के पिता डॉ. रामजीत विश्वकर्मा, रिटायर्ड मेडिकल ऑफीसर, उनकी मां अमृता विश्वकर्मा और बहन इंदू विश्वकर्मा को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में लंभुआ के रामजी विश्वकर्मा, बृजलाल विश्वकर्मा, बाबूलाल विश्वकर्मा, गंगा सागर विश्वकर्मा, अमृतलाल विश्वकर्मा, लीलावती विश्वकर्मा, अनामिका विश्वकर्मा, अनोखी विश्वकर्मा, जोखन विश्वकर्मा, जीतलाल विश्वकर्मा, हरिप्रसाद विश्वकर्मा, रामलाल विश्वकर्मा, उमाशंकर विश्वकर्मा,  रामानुज विश्वकर्मा, सुभाष विश्वकर्मा शिक्षक, विजय विश्वकर्मा, सुनील विश्वकर्मा, ओमप्रकाश विश्वकर्मा, संतकुमार विश्वकर्मा, अशोक विश्वकर्मा, गंगाराम विश्वकर्मा, राकेश विश्वकर्मा और राजू विश्वकर्मा ने काफी सहयोग किया।

डॉ. मुकेश विश्वकर्मा, भोलानाथ विश्वकर्मा (चौधरी), चंद्रकांत विश्वकर्मा (सभासद – राजा नगर), डॉ. रामशरण विश्वकर्मा और डॉ. पवन विश्वकर्मा समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भक्तिमय संगीत का आनंद लिया।