स्वर्णिम भारत के अनूठे रहस्यों से रूबरू करातीं ध्यान पासिका की कलाकृतियां

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संवाददाता
मुंबई, स्वर्णिम भारत के अनूठे रहस्यों की ओर नज़र दौड़ाएं तो सही मायने में समृद्ध सनातन भारत की पहचान भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम राम से नहीं, बल्कि सृष्टि के निर्माण के लिए अपनी शक्ति को ही ख़ुद से पृथक कर देने वाले अर्धनारीश्वर शिव, संपूर्ण संसार को प्रेम का अनूठा पाठ पढ़ाने वाले भगवान कृष्ण, दुनिया को ध्यान यानी मेडिटेशन की विधा के बारे में जागरूक करने वाले गौतम बुद्ध और आधुनिक योग के प्रवर्तक महर्षि पतंजलि से होती है। युवा पेंटर ध्यान पासिका ने इसी परिकल्पना को सजीव चित्रण किया है।

ध्यान पासिका की समकालीन कलाकृतियों में से एक कलाकृति सबको अपनी ओर खींच रही हैं, जिसमें कलाकार ने अपनी परिकल्पना में सनातन भारत की पहचान के लिए चार सबसे प्रमुख विभूतियों शिव, कृष्ण, बुद्ध और पतंजलि को कैनवास पर बड़ी ही ख़ूबसूरती से उकेरा है। इसीलिए ध्यान पासिका (Dhyan Passika) की समकालीन कलाकृतियों पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी ‘भारत: एक सनातन यात्रा’ दक्षिण मुंबई के जहांगीर आर्ट गैलरी में आकर्षण का केंद्र बन हुई है।

अगर आप अच्छी पेंटिंग देखने के शौक़ीन हैं और भारत की सनातन यात्रा के रहस्यों से भी रूबरू होना चाहते हैं तो आपको समय निकाल कर कम से कम एक बार जहांगीर आर्ट गैलरी ज़रूर जाना चाहिए। आपको अच्छा लगेगा, क्योंकि आर्ट गैलरी में ध्यान पासिका ने अपनी समकालीन कलाकृतियों पर आधारित पेंटिंग प्रदर्शनी ‘भारत: एक सनातन यात्रा’ का आयोजन किया है। सभी कलाकृतियां एक से बढ़कर एक हैं और सबसे बड़ी बात सारी कलाकृतियां ओशो के दर्शन से प्रेरित हैं।

प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन करने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने ध्यान पासिका की परिकल्पना की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी कलाकृतियां असाधारण हैं। ध्यान पासिक ने रंग और ब्रश के माध्यम से कैनवास पर सनातन भारत को बड़ी ख़ूबसूरती से परिभाषित किया है। सारी कलाकृतियों को देखने के बाद यह तय करना मुश्किल लगता है कि किसे सर्वश्रेष्ठ कहा जाए, क्योंकि सभी कलाकृतियां असाधारण हैं।

पद्मश्री से अलंकृत प्रख्यात फिल्म निर्माता, लेखक एवं निर्देशक डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी ने अपने संबोधन में ध्यान पासिका की परिकल्पना को असाधारण क़रार देते हुए कहा कि कोई भी घर पेंटिंग के बिना पूरा नहीं हो सकता। जिस घर में पेंटिंग है वही घर पूर्ण है। समारोह में ओशो वर्ल्ड मैगज़ीन के संपादक स्वामी चैतन्य कीर्ति ने भी अपने विचार व्यक्त किए और उन्होंने ध्यान की सभी कलाकृतियां को उच्च कोटि का बताया। प्रदर्शनी में भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने भी लोगों को संबोधित किया।

कहना न होगा कि ‘भारत एक सनातन यात्रा’ एक अनोखी प्रदर्शनी है, जिसमें ध्यान पासिका की नव-आध्यात्मिक कलाकृतियों को प्रस्तुत किया गया है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से स्वर्णिम भारत के अनूठे रहस्यों को ध्यान पासिका ने अपने कैनवास पर उकेरा है। भारत की ज्योतिर्मय दिव्यता और शाश्वत ज्ञान परंपरा को भी उन्होंने रेखांकित करने का प्रयास किया है। यह कला प्रदर्शनी मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में सोमवार को शुरू हुई और 27 फरवरी, 2022 तक चलेगी। शहर के कला समीक्षकों ने भी ध्यान पासिका की अनूठी कल्पना की तारीफ़ की है।

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