मालाड स्टेशन की बुकिंग क्लर्क हार्ट के मरीज से बोली, रेल का टिकट नहीं मिलेगा, एंबुलेंस से जाओ नायर अस्पताल

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मुंबई, महाराष्ट्र सरकार और भारतीय रेलवे ने कोरोना संक्रमण काल में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान मरीज और उसके साथ उसके परिजन को घर से अस्पताल जाने के लिए लोकल ट्रेन में यात्रा करने की अनुमति दी है, इसके बावजूद मुंबई के मालाड पूर्व में बुकिंग काउंटर पर बैठी महिला क्लर्क ने मंगलवार (15 जून 2021) की सुबह अनिल तिवारी नाम के हार्ट के मरीज को मालाड से मुंबई सेंट्रल जाने के लिए टिकट देने से साफ इनकार कर दिया।

यह घटना मंगलवार को सुबह आठ बजे हुई। जब नायर अस्पताल जाने के लिए मालाड पूर्व के रहने वाले अनिल तिवारी की पत्नी ममता तिवारी बुंकिंग काउंटर पर टिकट लेने के लिए गई। क्लर्क ने साफ-साफ कहा कि केवल जरूरी सेवा से जुड़े लोगों को ही टिकट मिलेगा। जब महिला क्लर्क ने टिकट देने से इनकार किया तो अनिल तिवारी खुद काउंटर पर गए और 15 जून 2021 का नायर अस्पताल के डॉक्टर का अपॉइंटमेंट लेटर दिखाते हुए आग्रह किया, “प्लीज़ मैडम, एक घंटे में मुझे नायर अस्पताल पहुंचना है। हार्ट सर्जरी से पहले मेरा कुछ जरूरी टेस्ट होना है, जिसके लिए डॉक्टर ने सुबह 9 बजे अस्पताल पहुंचने को कहा है। इसलिए टिकट दे दीजिए प्लीज।”

अनिल तिवारी की बात सुनकर महिला क्लर्क बोली, “आप हार्ट के मरीज हैं तो आप एंबुलेंस से अस्पताल जाइए। मैं रेल का टिकट आपको नहीं दे सकती। आप प्लीज काउंटर से हट जाइए।” ज्यादा विवाद बढ़ता देखकर उस महिला क्लर्क ने किसी नीलेश नाम के स्टेशन मास्टर या किसी अधिकारी को फोन किया और उनसे बातचीत करने के बाद बोली, “अब तो टिकट बिल्कुल नहीं दूंगी, आपको जो करना है कर लीजिए, जिसको फोन करना है कर लीजिए।”

इसके बाद निराश होकर अनिल तिवारी स्टेशन से हाइवे पर आए और रोड के रास्ते नायर अस्पताल गए। लेकिन उन्हें वहां पहुंचने में काफी बिलंब हो गया। नायर अस्पताल के डॉक्टरों को बताया गया कि रेल टिकट न मिलने के कारण रोड से आना पड़ा। इसलिए पहुंचने में देर हो गई तो मानवीय आधार पर बिलंब होने के बावजूद अस्पताल स्टाफ और डॉक्टर ने उनका टेस्ट किया गया। जिसकी रिपोर्ट आने के बाद उनकी सर्जरी के बारे में फैसला लिया जाएगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि पश्चिम रेलवे ने कोरोना के संक्रमण काल में बुकिंग काउंटर पर बैठी महिला की जरूर काउसलिंग नहीं की है क्या कि मरीज, खासकर जब मरीज बता रहा है कि उसका दिल केवल 25 फीसदी कार्य कर रहा है, इसलिए उन्हें बिना बहस किए टिकट दे दिया जाए। अगर पश्चिम रेलवे ने महिला क्लर्क को आवश्यक प्रशिक्षण दिया है तो उसने नायर अस्पताल का अपॉइंटमेंट लेकर दिखाने के बावजूद टिकट क्यों नहीं दिया?

शिवसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस बारे में ट्विट करके रेलमंत्री पीयूष गोयल से पूछा है कि मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार क्यों हो रहा है। उन्होंने कहा कि क्या पश्चिम रेलवे ने बुकिंग काउटर पर बैठने वाले कर्लकों को लोगों, खासकर मरीज और उसके परिजन से कैसे व्यवहार और बातचीत करनी चाहिए, इसका प्रशिक्षण नहीं दिया है और अगर दिया है तो यह घटना कैसे घटी।

इस बारे में पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित ठाकुर ने कहा ने साफ झूठ बोलते हुए कहा है कि मरीज को दो टिकट दिया गया था, लेकिन मरीज पांच टिकट मांग रहा था। सुमित ठाकुर को पहले वहां के सीसीटीवी कैमरे चेक करने चाहिए कि मरीज के साथ कितने लोग थे। मरीज के साथ उसकी पत्नी, उसकी भाभी और एक पुरुष मित्र थे। चूंकि मरीज का हार्ट केवल 25 फीसदी काम करता है, इसलिए एहतियात के तौर पर उसके साथ दो और लोग जा रहे थे, ताकि सरकारी अस्पताल में भागदौड़ की जा सके।