पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों व मुहाजिरों की हालत बहुत दयनीय – असगर वजाहत

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2016

चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई की 101वीं महफिल सजी

मुंबई, पाकिस्तान और ईरान समेत दुनिया के कई देशों की यात्रा करने और यात्रा संस्मरण लिखने वाले सुप्रसिद्ध सैलानी और साहित्यकार असगर वजाहत (Asghar Wajahat) ने भारत में अल्पसंख्यकों के साथ कथित तौर पर दोयम दर्जे के व्यवहार का रोना रोने वाले लोगों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि ऐसे लोगों को पाकिस्तान जाकर वहां अल्पसंख्यकों की हालत देखनी चाहिए। पाकिस्तान में तो अल्पसंख्यकों को इंसान ही नहीं समझा जाता है। इतना ही नहीं विभाजन के समय जो मुसलमान पाकिस्तान गए थे, उन्हें तिरस्कार से मुहाजिर संबोधित किया जाता है और गरीब मुहाजिरों के साथ भी घोर पक्षपात और सौतेला व्यवहार किया जाता है।

श्री वजाहत ने रविवार की शाम चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई के साप्ताहिक अड्डेबाजी में बतौर अतिथि पाकिस्तान, ईरान, यूक्रेन, अंडमान निकोबार और पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी अपनी यात्राओं के कई रोचक प्रसंग और संस्मरण सुनाए और श्रोताओं के सवालों के बेबाकी से जवाब दिए। श्री वजाहत ने कहा कि एकाध अपवादों को छोड़ दें तो भारत के अल्पसंख्यक भाग्यशाली है कि उनके साथ किसी तरह का पक्षपातपूर्ण व्यवहार नहीं किया जाता। लेकिन पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों व मुहाजिरों की हालत बहुत चिंताजनक है।

श्री वजाहत ने कहा कि पाकिस्तान में अगर पठानों और मुहाजिरों के बीच संघर्ष होता है तो पठानों का इलाज बढ़िया अस्पतालों में होता है, जबकि मुहाजिरों का उपचार सुविधाविहीन अस्पताल में होता है। उन्होंने कहा कि उनका यह अनुभव है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक बिल्कुल खुश नहीं रहते। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना के बारे में एक लतीफा मशहूर है कि पाकिस्तानी सेना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने पाकिस्तान पर विजय प्राप्त कर ली है।

पाकिस्तान में एक बार अल्पसंख्यकों की हालत जानने के लिए एक बार श्री वजाहत ने लाहौर में किसी हिंदू मंदिर में जाने की इच्छा जताई। लेकिन कई घंटे भटकने के बाद उन्हें लाहौर जैसे शहर में भी कोई मंदिर नहीं मिला। श्री वजाहत ने बताया कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि के विवादास्पद ढाचें को गिराने की खबर जैसे ही पाकिस्तान के मुल्तान में पहुंची, वहाँ कई सदी पुराने ऐतिहासिक सूर्य मंदिर ज़मींदोज़ कर दिया गया। सबसे बड़ी बात सूर्य मंदिर जो किसी मस्जिद के ऊपर नहीं बनाया गया था।

एक अन्य संस्मरण का जिक्र करते हुए श्री वजाहत ने कहा, “एक बार मेरे विभाजन के समय मुल्तान से घर-बार छोड़कर भारत आए मेरे एक करीबी हिंदू मित्र ने कहा कि पाकिस्तान जा रहे हो तो मुल्तान में मेरी हवेली की खींचकर फोटो लेते आना। उन्होंने पता बताते हुए कहा कि मेरी हवेली मुल्तान के दिल्ली गेट से आगे गुरुद्वारे के पास तीसरी गली में चौथा मकान है। जब मैं वहां पहुंचा तो कोई गुरुद्वारा नहीं मिला। पता करने पर एक बुजुर्ग ने बताया कि हां, यहां एक गुरुद्वारा होता था, लेकिन वह धीरे-धीरे खंडहर बन गया और जमीदोज हो गया। अब उस जमीन को दूसरे लोगों ने अपने कब्जे में ले लिया है। बहरहाल मैंने वहा का एक फोटो खींचा और वापस हो लिया।”

कथाकार सूरज प्रकाश ने अपनी महत्वपूर्ण शोधपरक किताब लेखकों की दुनिया में से दुनिया भर के लेखकों के रोचक क़िस्से सुनाए और रचनाकारों की अनोखी आदतों के बारे में बताया। उन्होंने ज़ोर दे कर कहा कि लेखन कहीं का भी हो, कम से कम अय्याशी नहीं होता। दुनिया भर के लेखकों ने अपने अपने स्तर पर तकलीफ़ें पायीं और अपना श्रेष्ठ हमें दिया।संवाद मंच की तीसरी कड़ी के रूप में सूरज प्रकाश की ही कहानी “दो जीवन समांतर” का आकर्षक और छू लेने वाला नाट्य मंचन पौड़ी गढ़वाल के संवाद नाट्य ग्रुप ने किया। पुरुष पात्र की भूमिका नाटक के निर्देशक अनूप गुसाईं ने निभायी और दीप्ति का पात्र जसप्रीत कौर ने निभाया। श्रोताओं ने पूरा कार्यक्रम बहुत मनोयोग से सुना।

कार्यक्रम की शुरूआत में सूरज प्रकाश ने मेहमानों का स्वागत करते हुए देवमणि पांडेय को कल मिले डॉ हरिवंशराय बच्चन साहित्यरत्न पुरस्कार के लिए बधाई दी। कार्यक्रम का समापन करते हुए देवमणि पांडेय ने फरवरी माह में होने वाले चारों कार्यक्रमों की जानकारी दी और सबसे अनुरोध किया कि वे इन सभी कार्यक्रमों में आएं और भागीदारी करें। चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई की इस बार की शाम अद्भुत और ख़ास रही कि आज इसकी 101वीं महफ़िल सजी थी। हालांकि चित्रनगरी संवाद मंच का गठन कोरोना काल में ही हो गया था लेकिन 2021 के वैलेंटाइन डे के दिन ही बड़े पैमाने पर आयोजनों की शुरुआत हो पायी थी और उसके बाद से इस मंच की नियमित गोष्ठियां, आयोजन और अड्डेबाजियां होती रहीं।

एक लंबा सफर तय करने के बाद आज यह मंच इस मुकाम पर आ पहुंचा है कि साहित्य प्रेमी और कला प्रेमी लोग अब फ़ोन, संदेश या विज्ञप्ति का इंतज़ार नहीं करते और सूचना भर मिलने पर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए स्वयं ही चले आते हैं। यह बात का संकेत भी है कि मुम्बई में ऐसे मंच की कितनी ज़रूरत थी और इस संवाद मंच ने सभी साहित्य प्रेमियों को जोड़ने का काम किया है। अब साहित्य प्रेमी दूर-दूर से आकर इसके साप्ताहिक कार्यक्रमों में शामिल होने लगे हैं। हर बार नये श्रोता जुड़ते हैं और एक दूजे तक इसके आयोजनों के बारे में ख़बर पहुंचाते हैं।

दर्शक दीर्घा में अभिनेता राजेंद्र गुप्ता, डॉ सत्यदेव त्रिपाठी, नवीन चतुर्वेदी, गंगाराम राजी, ओम प्रकाश तिवारी, हरि मृदुल, सुभाष काबरा, पूनम विश्वकर्मा, आभा दवे, शैलेन्द्र गौड़, प्रीति गौड़, असीमा भट्ट, मीता दास, रीता दास राम, प्रदीप गुप्ता, बसंत आर्य, डॉ मधुबाला शुक्ला, किरण भट्ट, रौनक खान, मधु अरोड़ा, डॉ दमयंती शर्मा, आदि का समावेश था। यह चित्रनगरी संवाद मंच मुंबई 101 वां कार्यक्रम था। कार्यक्रम की व्यवस्था कवि राजेश ऋतुपर्ण ने संभाली।