दुनिया को एक भाषा से जोड़ देगा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस

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ए आई महिला (AI Woman)

हरिगोविंद विश्वकर्मा

कल्पना कीजिए कि आप अचानक चीन या अफ्रीका के किसी दुर्गम इलाक़े में पहुंचा दिए गए हैं, जहां न तो कोई हिंदी जानता है और न ही अंग्रेज़ी और आप भी उनकी भाषा न तो बोल पा रहे हैं न ही पढ़ पा रहे हैं। ऐसी कठिन परिस्थिति में अचानक अगर वहां के लोग आपकी बोली हुई हिंदी भाषा को अपनी स्थानीय भाषा में सुनने लगें और आप भी उनकी स्थानीय भाषा को हिंदी में सुनने लगें तो निश्चित रूप से आपकी खुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। फिर तो आपके लिए दुनिया की सैर अपने गांव के सैर जैसी आसानी हो जाएगी। यह कोरी कल्पना नहीं है बल्कि कुछ ही साल में होने वाली हक़ीक़त है और यह कार्य करने जा रहा है आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता जो पूरी दुनिया को अपनी भाषा इस तरह परोसेगा कि पूरी दुनिया ही भाषा-निरपेक्ष हो जाएगी।

हम जानते हैं कि शानदार लेखन के बावजूद हिंदी साहित्यकार दुनिया में उपेक्षित रहे हैं। यही वजह है कि कई नोबेल पुरस्कार विजेताओं से बेहतर लिखने वाले हिंदी साहित्यकार भी अब तक साहित्य के सबसे प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से वंचित रहे हैं। लेकिन भविष्य में अगर दो-चार साल में एक बार साहित्य के नोबेल पुरस्कार से नवाजा जाने लगे तो हैरान मत होइएगा। जी हां, यह कार्य भी भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस ही करने जा रहा है। भारत में भले अभी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस शैशवावस्था में है लेकिन यक़ीन मानिए आने वाले दिनों में भारत एआई का केंद्र बनने वाला है।

डिजिटल प्रेमी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कह चुके हैं कि भारत दुनिया में ग्लोबल हब आफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनने की क्षमता रखता है। हिंदी ही नहीं बल्कि अन्य भारतीय भाषाएं बोलने वाले लोग इस सपने को सच कर सकते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता हमें अब तक की सीमाओं, वैश्विक एवं भाषाई असमानताओं आदि से मुक्त होकर विकास की नई दौड़ में बढ़त लेने का मौक़ा दे सकती है। वस्तुतः आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस एक नई भाषा लेकर आने वाला है। जिसमें कंटेंट अहम होगा।

देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें इसे लेकर प्रयोग किए जा रहे हैं। इसकी संभावनाओं के मद्देनज़र उद्योग जगत ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि वह उन क्षेत्रों की शिनाख्त करे जहाँ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल लाभकारी हो सकता है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित करने लगी है। कुछ साल में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बदौलत मानव की जीवन-शैली का कायाकल्प होने वाला है। हिंदी सहित हमारी भाषाएं भी इस बदलाव से अछूती नहीं रहने वाली हैं और उनका भी कायाकल्प होने वाला है।

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के कई लाभ

आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के कई लाभ हैं और इसने विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव किया है. यहां कुछ मुख्य लाभ हैं:

तेज़ी और सुधारित कामकाजी: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सिस्टम निरंतरता से काम कर सकते हैं और मानवों की तुलना में तेज़ी से और सुधारित तरीके से काम कर सकते हैं।

डेटा विश्लेषण और पैटर्न पहचान: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस अद्भुत रूप से बड़े और जटिल डेटा सेट्स को विश्लेषण कर सकता है और उसमें पैटर्न पहचान सकता है जो मानवों के लिए कठिन हो सकता है।

स्वतंत्र निर्णय लेना: कुछ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सिस्टम आत्मनिर्णय लेने की क्षमता विकसित कर सकते हैं, जिससे वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकते हैं बिना मानव हस्तक्षेप के।

कार्यक्षमता में सुधार: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस कार्यों को सुधारने और स्वतंत्रता प्रदान करने में मदद कर सकता है, जिससे लोग और संगठन अधिक कार्यक्षम बन सकते हैं।

रोबोटिक्स: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल रोबोटिक्स में हो रहा है, जिससे कई तकनीकी और नौकरी विकसित हो रही हैं, जो मानवों के लिए खतरे और मोनोटनी को कम कर सकती हैं।

औरतों और मिनॉरिटीज के लिए समर्थन: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सामाजिक न्याय की दिशा में भी काम कर सकता है, जैसे कि उपयोगकर्ताओं के अनुभवों में न्याय की गारंटी देना और अनुकूलता को बढ़ावा देना।

लेकिन इसके साथ ही, यह जरूरी है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का ठीक से उपयोग किया जाए और इसके नैतिक, सामाजिक, और कानूनी पहलुओं का ख्याल रखा जाए, ताकि इसके अनुप्रयोग से किसी को नुकसान न हो।