कफनचोर बीएमसी – 300 रुपए के बॉडी बैग का टेंडर 6719 रुपए में दे दिया

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मानवता का तकाजा यह है कि जहां लोग बड़ी तादाद में मर रहे हों, वहां कोई भी संवेदनशील आदमी या संस्थान न तो राजनीति करता है और न ही उस मुद्दे पर कोई सौदेबाजी करता है, लेकिन शिवसेना शासित बृहन्मुंबई महानगर पालिका के अधिकारी और नगरसेवक मातम के माहौल में भी मुंबई की जनता को चूना लगा रहे हैं।

कोरोना संक्रमण काल में मुंबई भारत का न्यूयॉर्क बन गई है। अस्पतालों में लोगों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं है। मुरदाघरों में शवों को रखने के लिए जगह नहीं बचा है। कहने का मतलब यहां हर नागरिक ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहा है। लेकिन देश की आर्थिक राजधानी में बृहन्मुंबई महानगर पालिका के अफसरान शव को लपेटने वाले बॉडी बेग के लिए मनमाना टेंडर मंजूर करके मोल लगाकर अपनी जेब भरने में लगे हैं।

सबसे बड़ी बात कोरोना से मरने वाले मरीजों के शव को कवर करने वाले प्लास्टिक बॉडी बैग की कीमत बाज़ार में केवल 200 रुपए से 300 रुपए के बीच में है। बड़े पैमाने पर खरीदारी करने पर बॉडी बैग की कीमत केवल 150 रुपए तक पड़ती है। लेकिन बीएमसी प्रति बॉडी बैग 6719 रुपए कीमत वाले टेंडर को मंजूर किया है।

सबसे अहम बीएमसी ने बॉडी बैग की आपूर्ति करने का टेंडर वेदांत इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को दिया है। मजेदार बात यह है कि वेदांत इन्फोटेक प्लास्टिक का सामान बनाती ही नहीं, बल्कि यह कंपनी मेटल कास्टिंग का काम करती है।

बीएमसी में हुए इस कथित बॉडीबैग घोटाले के बाद बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल और महापौर किशोरी पेंडणेकर सवालों के घेरे में आ गए हैं। कमिश्नर ने कहा है कि इस सौदे को रद कर दिया गया है। हालांकि राज्य के हेल्थ मिनिस्टर राजेश टोपे ने कहा है है कि उन्होंने बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल को इस पूरे मामले की जांच कराने और धांधली करने वाले अधिकारी के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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