स्त्री की चीख से निकली हैं पूनम की ग़जलें – डॉ. सोमा घोष

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"सुब्ह शब भर..." का विमोचन करते हुए (बाएं से) डॉ. सोमा घोष, गीतकार देवमणि पांडेय, प्रो. नंदलाल पाठक, आश करण अटल, नवीन जोशी नवा, पूनम विश्वकर्मा, डॉ. रामजीत विश्वकर्मा और प्रमोद कुश तनहा।

पूनम विश्वकर्मा के ग़ज़ल संग्रह “सुब्ह शब भर…” का विमोचन

मुंबई। शास्त्रीय गायिका पद्मश्री डॉ. सोमा घोष ने गीतकार पूनम विश्वकर्मा के पहले ग़ज़ल संग्रह “सुब्ह शब भर…” को अतंरराष्ट्रीय महिला सप्ताह के मौके पर महिलाओं को समर्पित करते हुए कहा कि पूनम की ग़जलें समाज में गाहे-बगाहे स्त्री के साथ होने वाले दोयम दर्जे के व्यवहार के प्रति स्त्री की चीख से निकली हैं। पूनम की लिखा एक ग़ज़ल “मैं भी इंसान हूँ ये बताया गया। पर मैं औरत हूँ ये भी सिखाया गया। ये मकाँ ख़ूबसूरत तो था पहले भी, मुझ को ला कर इसे घर बनाया गया।” को तरन्नुम में गाकर उन्होंने माहौल को पूर्णतः स्त्रीमय कर दिया।

इंशाद फाउंडेशन और चित्रनगरी संवाद मंच की ओर से गोरेगांव पश्चिम के केशल गोरे हॉल में आयोजित एक समारोह में ‘सुब्ह शब भर’ का विमोचन प्रो. नंदलाल पाठक, कथाकार सूरज प्रकाश, शास्त्रीय गायिका और भारतरत्न बिस्मिल्लाह ख़ाँ की मानस पुत्री पद्मश्री आदरणीया डॉ. सोमा घोष, गीतकार देवमणि पांडेय, नवीन जोशी नवा, सिद्धार्थ शांडिल्य, पूनम के पिता डॉ. रामजीत विश्वकर्मा और प्रमोद कुश तनहा के हाथों हुआ। दर्शक दीर्घा में मुंबई के साहित्य-जगत से जुड़े ढेर सारे नामचीन उपस्थित थे।

डॉ सोमा घोष का सम्मान करती हुईं पूनम विश्वकर्मा, साथ में खड़े हैं पूनम के पिता डॉ. रामजीत विश्वकर्मा।

डॉ. सोमा घोष ने पूनम के गजल संग्रह की खूब सराहना करते हुए कहा कि पूनम की ग़जलें में प्यार की गुप्तगू होती है। एक औरत पुरुष से जो प्यार और सम्मान की अपेक्षा रखती है, शायद उसकी वह उम्मीद पूरी नहीं होती। तो उसकी टीस उसने मन में रह जाती है। इस ग़ज़ल संग्रह की ख़ासियत यह है कि पूनम की हर गजल गाने लायक है।

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी पूर्व अध्यक्ष प्रो. नंदलाल पाठक ने कहा कि अमूमन किसी की पहली किताब बहुत कम प्रभावशाली होती लेकिन हिंदी और भोजपुरी सिनेमा के लिए गीत लिख चुकी पूनम विश्वकर्मा का पहला ग़ज़ल संग्रह “सुब्ह शब भर…” राग और अनुराग का समन्वय और हवा का ताज़े झोंके की तरह है। उनका पहला ही ग़ज़ल संग्रह इतना दमदार होगा, किसी ने अनुमान भी नहीं किया था।

दर्शक दीर्घा में बैठे हुए (बाएं) से कमलेश पाठक, हरीश पाठक, आश करण अटल, डॉ. रामजीत विश्वकर्मा, नवीन जोशी नवा, सत्यम आनंद, जीनत कुरैशी, अर्चना जौहरी और प्रज्ञा शर्मा… दूसरी पंक्ति में बैठी हैं रोशनी किरण, डॉ दमयंती शर्मा, सविता दत्त, कमर हाजीपुरी, और आशू शर्मा

प्रो पाठक कहा कि पूनम की खूबी यह है कि उनके पास जो विषय है, वह है अथाह प्रेम है। संग्रह में विविधता में एकता की झलक दिखती है। सबसे अच्छी बात कि किताब में अच्छी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। इस संग्रह की किताब में प्रेम झलक रहा है। उन्होंने कहा कि काव्य अथवा गजल लेखन विधा के लिए आवश्यकता, प्रतिभा, व्युत्पत्ति इन चीजों की आवश्यकता होती है। प्रतिभा की धनी पूनम के शेरों में जो परिपक्वता है,वह बिना अध्ययन और अभ्यास के संभव हो नहीं हो सकता। पूनम ने जो कुछ लिखा, वह उनका अपना और मौलिक है।

कथाकार सूरज प्रकाश समेत सभी साहित्यकारों ने भी ‘सुब्ह शब भर’ की खूब सराहना की। गीतकार और शायर देवमणि पांडेय ने गजल संग्रह ‘सुब्ह शब भर’ की समीक्षा कर कहा कि पूनम विश्वकर्मा के पिता जी का स्वप्न था कि उनके गजलों का एक संग्रह प्रकाशित हो, सो आज वह पूरा हुआ। यह उपलब्धि की बात है। उन्होंने कहा कि इस गजल संग्रह में जीवन दर्शन और मुहब्बत की खुशबू भी है, जिसे लोगों को जरूर पढ़ना चाहिए। पुस्तक परिचय इंशाद फाउंडेशन के प्रवर्तक नवीन ‘नवा’ ने दिया। उन्होंने बताया कि पुस्तक के कवर की पेंटिंग पूनम की 15 वर्षीय बेटी सौम्या विश्वकर्मा ने बनाई है, जो 10वीं की छात्रा है। कार्यक्रमका संचालन सिद्धार्थ शांडिल्य ने किया और खुद पूनम विश्वकर्मा ने कार्यक्रम में शामिल सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।