अब टाटा मेमोरियल सेंटर में हर साल होगा 50 हजार मरीजों का ब्लड ट्रांसफ्यूजन से इलाज

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भारतीय स्टेट बैंक ने बढ़ाया मदद का हाथ

संवाददाता
मुंबई, कैंसर इलाज का एशिया का सबसे बड़ा और भरोसमंद अस्पताल टाटा मेमोरियल सेंटर (Tata Memorial Centre) कैंसर ने अधिक से अधिक कैंसर मरीजों की जान बचाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यूक्लिक-एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्टिंग (Nucleic Acid Amplification Test) यानी नैट प्रोजेक्ट के तहत टीएमसी हर साल 50 हजार मरीजों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन (Blood Transfusion) देगा और 35 हजार ब्लड सैंपल का न्यूक्लिक-एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग की जाएगी।

कैंसर मरीजों की जान बचाने के लिए अस्पताल टाटा मेमोरियल सेंटर कैंसर ने इस प्रोजेक्ट के लिए भारतीय स्टेट बैंक के सीएसआर आर्म एसबीआई फाउंडेशन और एसबीआई डीएफएचआई के साथ भागीदारी की है। इस समझौते के बाद कैंसर मरीजों के इलाज के सबसे सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया को गति मिलेगी।
टाटा मेमोरियल सेंटर और भारतीय स्टेट बैंक की भागीदारी की इस ऐतिहासिक पहल का स्वागत करते हुए एसबीआई के चेयरमैन दिनेश खारा ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक मानत समाज के हित में बीमारियों के इलाज के लिए नवीनतम टेक्नॉलॉजी की मदद लेने में विश्वास रखता है।

दिनेश खारा ने कहा, “हमें उम्मीद है कि कैंसर इलाज में मील का पत्थर साबित हो रहे न्यूक्लिक-एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्टिंग और व्यापक पैमाने पर की जाएगी। हमें खुशी है कि एसबीआई फाउंडेशन के लगातार प्रयासों से यह संभव हो पाया है और हर साल 50 हजार से अधिक कैंसर मरीजों का इलाज किया जाएगा।” एसबीआई चेयरमैन ने यह भी कहा, “इस पहल के जरिए भारतीय स्टेट बैंक कैंसर के ट्रीटमेंट के लिए ईको सिस्टम को सशक्त करना चाहता है। कैंसर मरीजों के लिए आगे का रास्ता बहुत मुश्किल और लंबा होता है। लेकिन इसे हम मिल कर आसान करना चाहते हैं। हमें यह कहने मे संकोच नहीं कि भारत में कैंसर के इलाज के लिए निश्चय ही एक सुरक्षित भविष्य है।”

इस अवसर पर टाटा मेमोरियल सेंटर के निदेशक डॉ. आर.ए. बडवे ने भी संबोधित किया। डॉ. आर.ए. बडवे ने अपने संबोधन में कहा, “यदि रक्त जीवन बचाता है, तो हम इसे पहले से भी कहीं अधिक सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि एसबीआई जैसी देश की सबसे बड़ी कॉमर्शियाल बैंक इस मानवीय कार्य में हाथ बंटाया है।”
टाटा मेमोरियल अस्पताल के निदेशक डॉ सी.एस. प्रमेश ने कहा, “टाटा मेमोरियल में, हम अपने सभी रोगियों को उनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति के बावजूद उच्च गुणवत्ता, साक्ष्य-आधारित और सुरक्षित कैंसर देखभाल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारे 60% से अधिक रोगियों का इलाज पूरी तरह से मुफ्त या अत्यधिक रियायती खर्च पर किया जाता है। हम एसबीआई फाउंडेशन के आभारी हैं कि उसने एनएटी परीक्षण में हमारा सहयोग किया जो हमें यह सुनिश्चित करने में सक्षम बनाएगा कि हमारे मरीजों को दिया गया रक्त बिल्कुल सुरक्षित और किसी भी संक्रमण से मुक्त है।

टाटा मेमोरियल सेंटर के ट्रांसफ्यूजन विभाग के प्रमुख डॉ एस बी के राजाध्यक्ष ने कहा, “रक्त का NAT परीक्षण, हालांकि महंगा है, लेकिन रक्त की जांच के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह मानव जीवन को बचाने के लिए एक विवेकपूर्ण निवेश है। एनएटी परीक्षण किया गया रक्त विशेष रूप से उन कैंसर रोगियों के लिए वरदान साबित होगा, जिन्हें उपचार के दौरान कई बार रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। टाटा मेमोरियल सेंटर की जनसंपर्क अधिकारी स्वाति म्हात्रे के अनुसार न्यूक्लिक-एसिड एम्पलीफिकेशन टेस्टिंग यानी नैट प्रोजेक्ट के तहत मरीजों में कैंसर के लक्षण की पहचान बहुत पहले ही कर ली जाएगी। अब तक यह होता रहा है कि मरीजों में कैंसरग्रस्त सेल्स की पहचान जब तक होती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। नैट प्रोजेक्ट के तहत एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, आदि जैसी बीमारियों से ग्रस्त लोगों के रक्त के की जांच करके उनमें कैंसरग्स्त सेल्च के संक्रमणों का पहले चरण में पता लगा लिया जाएगा।

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