प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी – चायवाले बालक से सबसे बड़े लोकतंत्र के सबसे सशक्त नेता बनने का सफर

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“मैं अकेला ही चला था जानिब–ए–मंजिल मगर, लोग आते गए और कारवां बनता गया!” यह चर्चित शेर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अब तक के जीवन सफ़र को महज़ एक अल्फ़ाज़ में ही बयान कर देता है। जब 17 साल की कच्ची उम्र में एक दिन अचानक नरेंद्र घर से निकल गए थे, तब किसी ने शायद ही सोचा होगा कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब यह युवक देश का ही नहीं दुनिया का सर्वाधिक लोकप्रिय व्यक्ति होंगा और एक बहुत बड़ा हुजूम उसके साथ होगा। लेकिन आज यही सच है, चाहे कोई स्वीकार करे या नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) दुनिया के सबसे पॉप्युलर लीडर हैं। उनका जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक, पूरे देश में ‘नरेंद्र मोदी नमो–नमो’ के नारे लग रहे हैं। उनकी अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी का जनाधार पूरे देश में बढ़ रहा है।

दरअसल, तमाम आर्थिक तंगियों और अन्य समस्याओं के बावजूद उनकी माताश्री हीराबा मोदी ने अपने सभी बच्चों की बहुत पॉज़िटिव माहौल में परवरिश की। उन्होंने बालक नरेंद्र के अंदर संस्कार और जनसेवा का ऐसा पौधा रोप दिया जो कालांतर में बढ़कर वटवृक्ष का आकार धारण कर लिया। हिंदुस्तानी सियासत के एक से एक महारथी आजकल उसी वटवृक्ष की छांव के नीचे अपने लिए स्पेस की तलाश कर रहे हैं। कभी गुजरात के ग़ुमनाम वड़नगर रेलवे स्टेशन पर कभी दौड़-दौड़कर चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी फिलहाल वर्ल्ड पॉलिटिक्स के आसमान में ध्रुव तारे की तरह चमक रहे हैं।

धुर–राष्ट्रवादी विचारधारा के पैरोकार नरेंद्र मोदी को क़रीब से जानने वालों का मानना है कि महारथी अर्जुन की तरह उनकी निग़ाह हर पल केवल और केवल अपने लक्ष्य पर ही रहती है। किसी भी तरह के प्रतिकूल या विपरीत हालात से वह बिल्कुल भी पस्त नहीं होते, बल्कि उन्हें मुसीबतों को खूबसूरत अपॉरच्युनिटीज़ में तब्दील करने में महारत हासिल है। कम से कम कोरोना संक्रमण काल में पूरा देश इसका गवाह रहा है। 140 करोड़ लोगों के देश में कोरोना से सफलतापूर्वक लड़ना और 75 करोड़ से अधिक लोगों को कोरोनारोधी वैक्सीन देने की उपलब्धि केवल नरेंद्र मोदी के कारण देश हासिल कर सका है।

अनुच्छेद 370 का खात्मा असाधारण उपलब्धि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सबसे बड़ी उपलब्धि रही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए की खात्मा करना। 5 अगस्त 2019 को लिए अपने केवल इसी फैसले से नरेंद्र मोदी भारत से सबसे चहेते राजनेता बन गए हैं। जम्मू-कश्मीर में उन्होंने वह कर दिखाया जो देश का दूसरा कोई नेता 1950 से 2019 तक नहीं कर सका। जम्मू-कश्मीर की सर्जरी करने के प्रधानमंत्री के साहसिक निर्णय के लिए भारत की जनता खासकर राष्ट्रवादी विचारधारा के हिंदू सदैव उनके ऋणि रहेंगे। छिटपुट घटनाओं को छोड़ दे तो आज जम्मू-कश्मीर शांति की ओर बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। इसका क्रेडिट केवल और केवल नरेंद्र मोदी को ही जाता है।

अयोध्या विवाद का स्थाई समाधान
यह संयोग है कि नरेंद्र मोदी 134 साल पुराने अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद पर अक्टूबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। इसके तहत अयोध्या की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दे दी। जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने की पहली सालगिरह यानी 5 अगस्त 2020 को नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भगवान श्री राम मंदिर की आधारशिला रखकरके मंदिर का शुभारंभ कर दिया। इससे पहले पहले ही कार्यकाल में नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम महिलाओं को तोहफा देते हुए तलाक-तलाक-तलाक के प्रवाधान को अपराध की श्रेणी में रखकर उस कृत्य के लिए सजा का प्रावधान कर दिया।

नरेंद्र मोदी का आरंभिक जीवन
प्राचीनकाल में कभी हड़प्पा सभ्यता का हिस्सा रहे उत्तर गुजरात का मेहसाणा जिला का इतिहास कोई चार हज़ार साल पुराना है। छोटे कस्बे वड़नगर के लोअर–मिडिल क्लास फ़ैमिली में 17 सितंबर 1950 को जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी और हीराबा मोदी की छह संतानों, पांच पुत्रों और एक पुत्री, में तीसरे नंबर पर हैं। दो भाई बड़े हैं और दो भाई और इकलौती बहन छोटी। बेहद तंग गली में ईंट और मिट्टी से बने मोदी परिवार के 12 फ़ीट चौड़े और 40 फ़ीट लंबे, तीन कमरों के घर में चंद खिड़कियां ही थीं, जिससे पर्याप्त रोशनी नहीं आ पाती थी। लिहाजा दिन में भी घंर में अंधेरा रहता था। उन दिनों बिजली नहीं थी, सो अंधेरा दूर करने के लिए घर में मिट्टी के तेल की डिबरी जलती रहती थी। उस डिबरी से रौशनी काम धुआं और कालिख ज़्यादा निकलती थी। उस घर में दामोदरदास अपने आठ सदस्यों वाले बड़े परिवार के साथ हंसी–खुशी रहते थे।

जीवन संघर्ष जीवन
होनहार नरेंद्र का शुरुआती बेहद जीवन संघर्ष, मुश्किल और ग़ुमनामी भरा था। इसके बावजूद वह जल्दी ही समाज के दबे–कुचले लोगों के हमदर्द और आवाज बन गए। पिताश्री दामोदरदास मोदी वड़नगर रेलवे स्टेशन पर चाय की स्टाल लगाते थे। तब सात साल के नरेंद्र एक हाथ में चाय से भरी केतली और दूसरे हाथ में कुल्हड़ लेकर सुबह-शाम यात्रियों को दौड़-दौड़ कर चाय पिलाते थे। चाय की बिक्री से जो पैसे मिलते, उसे लाकर पिताजी के हाथ में रख देते थे। महज़ सात साल के बालक का परिवार के लिए यह बड़ा कंट्रिब्यूशन था।

संघ ने दिया सपने साकार करने का मौका
पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट में इंस्पेक्टर पद से रिटायर नरेंद्र के सबसे बड़े भाई 74 साल के सोमाभाई मोदी के मुताबिक “नरेंद्र हमेशा कुछ अलग करना चाहता था। हम घर या स्कूल में जो करते थे, उससे ज़्यादा। वह सबसे अलग था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखा ने उसे अपने सपने पूरे करने का मौक़ा दिया और उसी की बदौलत आज वह दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता है।” 8 साल की उम्र में ही मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़ गए थे। 1971 में संघ का पूर्णकालिक कार्यकर्ता बनने के बाद उनकी राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा शुरू हुई। 1975 में आपातकाल के दौरान छिपकर वक्त गुजारना पड़ा। 1985 में भाजपा में संगठन का काम मिला।

वडनगर स्टेशन पर चाय की स्टाल
कारोबारी घंची समुदाय का मोदी परिवार का तेल पेरकर बेचने का पुश्तैनी धंधा था। मां बच्चों समेत पुश्तैनी काम करती थीं और आस-पड़ोस में काम कर लेती थी। नरेंद्र मोदी ने अमेरिका प्रवास के दौरान खुद बताया, “मेरी मां दूसरे के घर काम करके हम सबका पेट पालती थी। वह मां बरतन साफ करती थीं। इसके साथ हमारा वो पालन पोषण भी बखूबी करती थीं।” बहरहाल, उस सीमित आमदनी से बड़े परिवार की ज़रूरतें बमुश्किल पूरी होती थीं। इसलिए पिता अतिरिक्त आमदनी के लिए दामोदरदास स्टेशन पर चाय बेचते थे। नरेंद्र पिता का हाथ बंटाने के लिए सुबह–सबेरे ही स्टेशन पहुंच जाते थे। तब वड़नगर से रोज़ाना सुबह शाम केवल दो ट्रेनें ही गुज़रती थीं। इसके अलावा माल गाड़ियों में भैंस लेकर आने-जाने वालों को भी बालक नरेंद्र चाय पिलाता था। इससे परिवार का पेट पालने भर की आमदनी हो जाती थी। जैसे ही स्कूल की घंटी बजती, नरेंद्र बस्ता समेटकर स्कूल चले जाते थे।

स्कूल में ही दिख गई थी सक्रियता
प्राइमरी के बाद नरेंद्र ने कस्बे के गुजराती भागवताचार्य नारायणाचार्य हाईस्कूल में पढ़ाई की। संस्कृत पढ़ाने वाले प्रहलादभाई पटेल मेमोरीज़ कुरेदते हुए कहते हैं, “नरेंद्र पढ़ाई–लिखाई में एवरेज था पर डिबेट्स, नाटक और कल्चरल ऐक्टिविटीज़ में एकदम एक्स्ट्रा–ऑर्डिनरी। स्कूल में डिबेट क्लब बनाने पर नरेंद्र सबसे पहले सदस्य बना। वह रेगुलर आने वाले छात्रों में था। वह समर्पित एनसीसी कैडेट भी था। स्पीच देने की कला में तो उसका कोई सानी ही नहीं था। हर डिबेट कंपटिशन्स में लच्छेदार भाषा में प्रभावशाली भाषण देता था और पहला पुरस्कार झटक लेता था।”

नाटकों में अभिनय भी किया
नरेंद्र मोदी अच्छे अभिनेता थे। कोई भी रोल निभा लेते थे। 1965 में ‘जोगीदास खुमान’ नाटक खेला गया। जोगीदास सौराष्ट्र का डाकू था जो संत की संगति में आकर संत बन गया। नाटक में किशोर नरेंद्र ने राजा वजेसिंह महाराज का किरदार निभाया जिसे ख़ूब सराहा गया। चीनी आक्रमण पर आधारित नाटक ‘हरयाली नो हत्यारो’ में नरेंद्र एक देशभक्त युवक का किरदार निभाया। सोमाभाई कहते हैं, “नरेंद्र संघ की शाखा को सबसे ज़्यादा समय देता था। उसे साधू–संतों से मिलना अच्छा लगता था। एक दिन अचानक हमें पता चला कि उसने नमक-तेल खाना छोड़ दिया तो सबको चिंता हुई, क्योंकि तब ऐसा संन्यास लेने वाले करते थे।” संभवतः किशोर नरेंद्र उस समय उधेड़बुन में था कि गृहस्थ जीवन अपनाकर पारिवारिक जीवन बिताए अथवा ख़ुद को हिंदुत्व और मुल्क की सेवा के लिए समर्पित कर दे।

चायवाले बालक के बड़े सपने
मुसाफिरों को चाय पिलाते–पिलाते, नरेंद्र कब सपने बुनने लगे, उन्हें भी पता न चला। उनमें समाज और राष्ट्र के लिए कुछ करने का जुनून पैदा हो गया। 1965 में जब पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू हुआ, तब वह केवल 15 साल के थे। यह देश के लिए कुछ करने का सुनहरा मौक़ा था। युद्ध के दौरान नरेंद्र सुबह–सबेरे स्टेशन पहुंच जाते थे। उन दिनों सैनिक टुकड़ियां ट्रेन से कच्छ बॉर्डर जाती थीं। सैनिकों को ले जाने वाली ट्रेनें वड़नगर रुकती थीं। तब नरेंद्र ट्रेन में सवार सिपाहियों की सेवा करते थे। उन्हें मुफ़्त में चाय भी पिलाते थे। उनके छोटे–मोटे काम भी कर देते थे। किशोर नरेंद्र को बहुत मज़ा आता था। वह जानते थे कि उनकी उम्र बहुत कम है, इससे चाहकर भी सैनिक के रुप में देश की सेवा नहीं कर सकते, इसलिए अपने महान वतन के लिए लड़ने वाले जवानों की वह तन–मन–धन से सेवा कर रहे थे।

बाढ़ के समय लोगों की मदद
1967 में भयंकर बाढ़ आई और चारों ओर हाहाकार मच गया। उस, समय भी नरेंद्र अपने चंद साथियों को साथ लेकर बाढ़–पीड़ित लोगों की भरसक मदद कर रहे थे। उनको, उनके परिजनों और उनके मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे थे। उन सबके लिए रहने और खाने का इंतज़ाम कर रहे थे। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि निःसंदेह चाय बेचते–बेचते नरेंद्र ने बहुत बडे सपने पाल लिए, संभवतः उन्हें ही मूर्त रूप देने के लिए उस नरेंद्र ने आजीवन अकेले ही रहने का असाधारण फ़ैसला कर लिया था।

शर्मिष्ठा तालाब में तैराकी
वड़नगर कस्बे में मोदी के घर से थोड़ी दूर शर्मिष्ठा तालाब है। तब तालाब मगरमच्छों से भरा रहता था। हालांकि आसपास के लोगों के लिए वह पानी का इकलौता स्रोत था। लिहाज़ा, तालाब पर कपड़ा धोने, नहाने और मवेशियों को नहलाने वालों की भीड़ लगी रहती थी। लेकिन ख़तरनाक मगरमच्छों के डर से, कोई तालाब में ज़्यादा अंदर उतरने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था लेकिन मनमौज़ी स्वभाव का नरेंद्र बेख़ौफ़ होकर तालाब में कूदता, डुबकी लगाता और तैरता था। एक बार तो नरेंद्र मगरमच्छ का छोटा बच्चा घर लेकर आ गया। मां के समझाने पर नरेंद्र ने बच्चे को वापस तालाब में छोड़ दिया। यह तालाब आज भी शहर के लिए पानी का प्रमुख स्रोत है।

हटकेश्वर महादेव मंदिर में पूजा
वड़नगर के बीचोबीच 12वीं सेंचुरी का विशाल और भव्य हटकेश्वर महादेव मंदिर है। करीब एकड़ भर भूभाग पर फैले इस मंदिर में आगंतुक को गजब की शांति मिलती है। मंदिर के कर्ताधर्ता निखिल व्यासा बताते हैं कि यह मंदिर यहां के शासकों का कारण बच गया। यहां के शासकों को मुगल साम्राज्य से अच्छा तालमेल था इसलिए मंदिर तोड़ने वालों के कोप से यह बच गया। मंदिर का मंदिर परिसर में ही अपना अतिथि गृह भी है। वहां दूर दराज से आने वाले भक्त ठहरते हैं। मंदिर में आने वाले हर भक्त को तीन पुश्त से मंत्रोच्चारण के साथ दर्शन-पूजन करवाने वाले वैभव पंड्या बताते हैं नरेंद्र मोदी जब भी वड़नगर आते हैं, चुपचाप दर्शन करने चले आते है।

चार बार गुजरात के मुख्यमंत्री
गुजरात के भुज में आए भूकंप के बाद प्रशासनिक व्यवस्थाएं चरमरा गई थीं, तब 2001 में मोदी को मुख्यमंत्री बनाया गया। गुजरात दंगों को लेकर आरोपों से घिरे, लेकिन गुजरात को विकास की राह पर खड़ा करने में सफल रहे। उनके नेतृत्व में भाजपा को 2002 और 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में जीत मिली। 2012 के विधान सभा चुनाव में बड़े बहुमत के साथ जीत हासिल करने वाले नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद के सरदार पटेल स्टेडियम में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उस आयोजन में लाल कृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, राजनाथ सिंह और वैंकेया नायडू शामिल हुए थे।

दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री
गुजरात के विकास मॉडल को बेस बनाकर केंद्र की राजनीति में आए और 2014 में प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर पहली बार किसी गैर-कांग्रेसी पार्टी यानी भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाई। 2014 का चुनाव जीतने के बाद जब मोदी पहली बार संसद पहुंचे तो उन्होंने संसद में पहली बार प्रवेश करने से पहले संसद की सीढ़ियों पर मत्था टेका था। लोकतंत्र के प्रति अपने इस श्रद्धा भाव से उन्होंने पूरे देश का दिल जीत लिया। भारतीय संसद के प्रति ऐसा सम्मान जताने वाले वह पहले नेता था। बहरहाल, 2019 में पहले से बेहतर प्रदर्शन कर लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटे। हाल ही में टाइम मैगजीन ने 2021 के लिए दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी रखा है। मैगजीन ने बताया है कि मोदी भारत की राजनीति में सबसे ज्यादा प्रभाव रखने वाली शख्सियत हैं। ये लगातार दूसरा साल है जब प्रधानमंत्री मोदी को टाइम ने अपनी लिस्ट में जगह दी है।

बेहद अनुशासन काफी प्रिय हैं मोदी
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म साल 1950 में हुआ था। अंक ज्योतिष अनुसार 17, 8 और 26 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 8 होता है। इस अंक वाले लोगों पर शनि ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है। ये लोग गंभीर स्वभाव के माने जाते हैं। इन्हें अपने जीवन में अनुशासन काफी प्रिय होता है। मूलांक 8 वाले लोग जो भी कार्य करते हैं चुपचाप करते हैं। ये कब क्या करेंगे इस बात अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। इन्हें दिखावा बिल्कुल भी पसंद नहीं होता। शनि ग्रह से प्रभावित होने के कारण इस अंक के लोग काफी मेहनती और ईमानदार माने जाते हैं। ये जिस काम को हाथ में लेते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं। इनके लिए कोई भी काम असंभव नहीं होता। हर परिस्थिति में ये आसानी से ढल जाते हैं।

तेजी से विकसित होता वड़नगर
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का गृहनगर वड़नगर गुजरात के मेहसाणा जिला का विकासशील कस्बा है। यह रेल और सड़क मार्ग से जुड़ा है। यह कस्बा बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। शहर में बहुमंजिली इमारतें बन रही है। वड़नगर रेलवे स्टेशन का कायाकल्प हो रहा है। भारतीय रेल ने स्टेशन की इमारत के लिए आठ करोड़ रुपए दिए है। इमारत बनाने का काम बहुत तेजी से चल रहा है। पहले वड़नगर में मीटर गेज था और कल पटरी उखाड़ दी गई है। फिलहाल रेल गाड़ियों का आवागमन बंद है। वह ब्रॉडगेज की लाइन बिछाने का काम चल रहा है। जिस गुमटी में मोदी कभी चाय बेचा करते थे उसे महफूज रखा गया है। उसे उसी रूप में स्टेशन परिसर में रखा गया है।

हरिगोविंद विश्वकर्मा

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