द मोस्ट वॉन्टेड डॉन – एपिसोड – 10 – चावला गेस्ट हाऊस में पति का खून, पत्नी से रेप

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हरिगोविंद विश्वकर्मा
आपातकाल के बाद का यह वही दौर था जब करीम लाला के पठान गैंग के गुंडे पूरी तरह बेलगाम और निरंकुश हो चुके थे। किसी की जान लेने में वे पल भर भी संकोच नहीं करते थे। उसी समय नागपाड़ा के सर इब्राहिम रहीमतुल्ला मार्ग पर स्थित चावला गेस्ट हाऊस में एक नवविवाहित जोड़ा ठहरा था। वे लोग हनीमून माने के लिए मुंबई आए थे। दुल्हन बेहद ख़ूबसूरत थी। बाहर से लौटते समय उस पर पठान गिरोह के सईद बाटला और अयूब लाला की बुरी नज़र पड़ गई। उनकी नीयत ख़राब हो गई। रात में दोनों ने चावला गेस्टहाऊस पर धावा बोल दिया और सीधे कपल के कमरे में घुस गए। विरोध करने पर महिला का सामने उसके पति की चाकू मारकर हत्या कर दी। पति की लाश के पास ही उस नवविवाहिता के साथ दोनों गुंडों ने बलात्कार किया।

गैंगरेप की यह बर्बरतापूर्ण ख़बर अख़बारों की सुर्खियां बनी। पूरा शहर दहल उठा। मुंबई पुलिस शर्मसार थी। नए-नए पुलिस कमिश्नर बनाए गए वीवी चौबल की भी ख़ूब भद पिटी। इस घटना को अंजाम देने का उन पर भारी दबाव था। इसके बावजूद लाख हाथ-पांव मारने के बावजूद पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला। मज़ेदार बात यह थी कि इस बर्बरता के बारे में जानते तो सब थे, लेकिन पठानों के आतंक के चलते कोई मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं था। नाटिक़ अलग मिट्टी का बना पत्रकार था। उसे इस घटना के इनपुट्स मिले। उसने राज़दार में सनसनीखेज़ रिपोर्ट छाप भी दी। खुलासा कर दिया कि पति की हत्या और पत्नी से गैंरेप किसी और ने नहीं, बल्कि पठान गैंग के सईद और अयूब ने किया। अख़बार क्या छपा, डोंगरी पुलिस ने दोनों अयूब को गिरफ़्तार कर लिया। हत्या और बलात्कार का यह केस सॉल्व कर लिया गया। चौबल ने नाटिक़ को शाबाशी तो दी लेकिन उसे सुरक्षा देने में नाकाम रहे।

सईद और अयूब कई महीने आर्थर जेल में रहे। ज़मानत पर छूटते ही नाटिक़ को मारने की साज़िश रच डाली। 17 अगस्त 1977 की रात 3 बजे दोनों साथियों के साथ उसके घर में घुस गए। किडनैप कर उसे ग्रैंटरोड के क़ादर बिल्डिंग में आमिर ज़ादा की ऑफ़िस में ले गए। वहां उसे बहुत बुरी तरह मारा-पीटा। मारते-मारते उसे बेदम कर दिया। जब ऐसा लगा कि नाटिक मर गया तो रात में ही उसे माहिम की खाड़ी में फेंक आए। यह चमत्कार था कि नाटिक मरा नहीं, बल्कि दो दिन बेहोश रहने के बाद उसे होश आ गया। किसी तरह हिम्मत जुटाई और रेंगकर खाड़ी से बाहर आया। लेकिन बाहर आते ही फिर बेहोश हो गया। कुछ लोगों ने उसे देखा और लाश समझकर पुलिस को सूचित किया। उसे जेजे अस्पताल लाया गया, डॉक्टरों ने उसे ज़िंदा पाया। उसे आईसीयू में भर्ती करा दिया गया, जहां दो दिन ज़िंदा रहने के बाद उसकी मौत हो गई। उसकी हत्या से दाऊद को सदमा लगा। उसने हत्या के लिए ख़ुद को ज़िम्मेदार माना। लिहाज़ा, इंतक़ाम लेने की कसम खाई। पता चला कि गेस्ट हाऊस से नाटिक़ को अयूब और बाटला ले गए थे। यही दो लोग उसकी मौत के लिए ज़िम्मेदार थे। पठानों के साथ संघर्ष में दाऊद का साथ दिया बाशूदादा के पूर्व सहयोगी ख़ालिद पहलवान ने। दाऊद, ख़ालिद और उसके लोग अयूब और बाटला को खोजने लगे।

ज़िंदगी की भीख मांगने की ख़बर अकसर सुनी जाती है कि अमुक आदमी भगवान से ज़िंदगी की भीख मांग रहा है। लेकिन पहली बार डोंगरी मार्केट के लोगों ने किसी को मौत की भीख मांगते सुना। जिसने भी इस गुहार को सुना, वही थर्रा उठा। किसी की मौत इतनी भयानक हो सकती है और कोई इंसान इतना बेरहम हत्यारा हो सकता है, लोगों ने पहली बार देखा। दरअसल, ख़ालिद पहलवान के इन्फ़ॉर्मर ने सूचित किया कि अयूब चौपाटी के एक बार में बैठा दारू पी रहा है। दाऊद और ख़ालिद सीधे बार में पहुंच गए। अयूब वहां सचमुच मिल गया। वह बड़ी क़द-काठी का पठान था, इसके बावजूद ख़ालिद और दाऊद को देखकर कांपने लगा। उसने वहीं पेशाब कर दिया। वह इतना डर गया कि वहां से भागा। ख़ालिद और दाऊद ने उसका पीछा किया।

दाऊद इब्राहिम की संपूर्ण कहानी पहले एपिसोड से पढ़ने के लिए इसे क्लिक करें…

उस समय डोंगरी थाने में तैनात एक रिटायर पुलिस अफ़सर के मुताबिक डोंगरी मार्केट में ख़ालिद ने दौड़ाकर अयूब को पकड़ ही लिया। नीचे गिराकर उसके ऊपर चढ़ बैठा। खालिद हट्टा-कट्टा जवान था। वह अयूब को बेरहमी से पीटने लगा। इसके बाद खालिद पर खून सवार हो गया। अयूब को बेदम करने पर चाकू निकाली और उसके हाथ का अंगूठा काट दिया। अयूब चीखता रहा और खालिद ने उसके हाथ की बाकी चारो उंगलियां काट डाली। अयूब की चीख आसपास के इलाक़े में गूंज रही थी। लेकिन कोई घर से बाहर नहीं निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। अयूब की चीख से अविचलित खालिद ने उसकी हथेली काट दी। नस कटने से खून के फौव्वारे निकले जिससे खालिद का चेहरा खून से लाल हो गया।

हथेली के बाद आधा हाथ शरीर से अलग कर दिया। इसी तरह अयूब की भयानक चीख के बीच खालिद उसके शरीर के एक-एक अंग को काटता रहा। अयूब ने चिल्लाकर कहा कि गला काट दो इतनी पीड़ा सही नही जा रही है, लेकिन खालिद पर उसकी चीत्कार का कोई असर नहीं हुआ। अयूब मौत की भीख मांगता रहा और खालिद उसे काटता रहा। ऐसा लग रहा था वह अयूब का ख़ून पी रहा है। अयूब की दोनों बांह काट सड़क पर फेंक दिया। बहुत बड़ा भयावह नज़ारा था वह। अंत में ख़ालिद ने अयूब के दोनों पांव काट डाले और दूसरी ओर फेंक दिया। केवल धड़ में अयूब चिल्लाता रहा। पर कोई उसकी मदद करने नहीं आया। इस तरह अयूब क़रीब रात भर मौत की भीख मागता रहा लेकिन मौत को उस पर रहम सूर्योदय होने के बाद ही आई। इस तरह नाटिक़ की हत्या के एक महीने के अंदर अयूब को मार डाला गया। पुलिस ने अयूब की उंगलियों समेत लाश के दो दर्जन टुकड़े उठाकर उसका पंचनामा किया। अयूब को इतनी भयानक मौत देने के बाद ख़ालिद का ऐसा चेहरा उभरा कि पठान ही नहीं हर गैंग के अपराधी उससे थर्राने लगे। कई लोग यह भी बताते हैं कि अयूब की हत्या में दाऊद को सीनियर पीआई लीखा की मैन स्वीकृति मिली हुई थी।

बहरहाल, अब सईद बाटला से बदला लेने की बारी थी जो अयूब की मौत से बुरी तरह घबरा गया था। उसे खालिद सपने में आने लगा था। चंद दिन बाद ख़बरियों से पता चला कि बाटला डोंगरी के शराबखाने में दारू पी रहा है। दाऊद और ख़ालिद वहां पहुंच गए और बाटला को पकड़ लिया। उसके सभी खालिद से जान बचाने के लिए सिर पर पैर रखकर भाग गए। बाटला पकड़ लिया गया। उसकी बुरी तरह पिटाई हुई। ख़ालिद ने उसका भी अयूब जैसा हाल करना चाहता था। सो उसे पटककर चाकू निकाली और उसकी दो उंगलियां काट भी दी। ख़ून से लथपथ बाटला बुरी तरह चिल्लाता रहा और रहम की फरियाद करता रहा। वह अयूब की भयावह मौत को भूला नहीं था। लिहाज़ा, सहसा उसमें ऊर्जा आ गई और ख़ालिद की पकड़ से छूट गया। खालिद और दाऊद ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन ख़ून से सने होने के कारण हाथ से फिसल गया। बाटला को लगा, डोंगरी की गलियां फ़िलहाल सेफ़ नहीं हैं। लिहाज़ा थाने की ओर भागा। थाने में जाकर गिर पड़ा और बेहोश हो गया।

सीनियर इंस्पेक्टर लीखा उस समय थाने में नहीं थे। वरना, संभवः बाटला को दाऊद के हवाले करवा देते। बहरहाल, थाने में पहुंचने से बाटला की जान बच गई। हां, उसने अपने सभी ग़ुनाहों का इक़बाल कर लिया। उस पर हत्या का मुक़दमा चला और 14 साल की सज़ा हुई। दाऊद-साबिर गिरोह और पठान गैंग के बीच ख़ूनी गैंगवार फिर शुरू हो गया जो पठान गैंग के सफ़ाया होने तक लगातार चलता रहा।

(The Most Wanted Don अगले भाग में जारी…)

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