द मोस्ट वॉन्टेड डॉन – एपिसोड – 31 – दुबई में दाऊद इब्राहिम का ‘राम तेरी गंगा मैली’ की हिरोइन मंदाकिनी से ‘हॉट रोमांस’

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हरिगोविंद विश्वकर्मा
मुंबई बमकांड को साल भर गुज़र चुका था। शारजाह में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच चल रहा था। शोमैन राजकपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ की चर्चित नायिका मंदाकिनी की उन्हीं दिनों कुछ अख़बारों में दाऊद इब्राहिम के साथ मैच देखते हुए फोटो छप गई। इससे मुंबई ही नहीं पूरे देश में सनसनी मच गई। ब्लास्ट से पहले भी दाऊद वॉन्टेड क्रिमिनल था, इसके बावजूद बॉलीवुड में उसका ग़ज़ब का क्रेज़ था। सितारे उसके दावतनामे का बेसब्री से इंतज़ार करते रहते थे। बड़े अभिनेता चाहे-अनचाहे बुलाने पर दुबई पहुंच जाते थे। कुछ ख़ौफ़ से जाते थे तो कुछ गुडबुक में नाम लिखवाने के लिए जाते थे। बदले में उन्हें भाई से अच्छा नज़राना मिल जाता था। सिल्वर स्क्रीन के लोगों का मुंबई के बाद दुबई दूसरा ठिकाना माना जाता था। रेत में बसा शहर महफ़ूज़ ऐशगाह भी था।

नब्बे के दशक में कोई ऐसा अभिनेता या अभिनेत्री नहीं होगी, जिसने दाऊद के दरबार में ठुमके न लगाए हो। राजकपूर, राजेश खन्ना, महमूद, अनिल कपूर, शाहरुख ख़ान, सलमान खान, गोविंदा और जॉनी लीवर जैसे अभिनेता तक दाऊद की मेहमाननवाज़ी का लुत्फ उठा चुके हैं। शांति के पुजारी सुनील दत्त का अबिनेता बेटा संजय दत्त भी इस ग्लैमर से ख़ुद को नहीं बचा पाया। लेकिन मुंबई बमकांड के बाद बॉलीवुड से दाऊद का रिश्ता प्रत्यक्ष रूप से ख़त्म हो गया। इसीलिए मंदाकिनी की डॉन के साथ तस्वीर छपने पर लोगों का चौंकना लाज़िमी थी। उन दिनों टीवी मीडिया थी नहीं, इतके बावजूद मंदाकिनी और दाऊद के ‘हॉट रोमांस’ की ख़बरें अख़बारों की हेडलाइन्स बनने लगीं। कई अख़बारों में मंदाकिनी को मेहज़बीन के नाम से पेश किया। मुंबई के सांध्यकालीन अख़बारों के लिए लंबे समय तक मंदाकिनी न्यूज़ आइटम रही।

कहा जाता है कि 30 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में जन्मी मंदाकिनी को ‘राम तेरी गंगा मैली’ साइन करने से पहले तीन फिल्ममेकर रिजेक्ट कर चुके थे। 1980-90 के दशक में अपनी बोल्डनेस का जलवा दिखाने वाली मंदाकिनी का नाम कभी भी सफल अभिनेत्रियों की लिस्ट में शुमार नहीं हो पाया। मंदाकिनी ने साल 1985 में फिल्म ‘मेरा साथी’ से डेब्यू किया था। कहा जाता है कि एक्टर और डायरेक्टर राज कपूर ने पहली बार मंदाकिनी को देखा था। उस वक्त मंदाकिनी 22 साल की थी। राज कपूर ने ही ‘राम तेरी गंगा मैली’ में कास्ट करने से पहले मंदाकिनी का नाम बदल दिया था। इस फिल्म में मंदाकिनी ने जबरदस्त बोल्ड सीन दिए थे खासतौर पर झरने के नीचे वाला सीन। इस सीन में मंदाकिनी केवल सफेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी जिसमें उन्हें झरने के नीचे खड़े होना था। इस सीन को राज कपूर ने सेंसर बोर्ड में कैसे पास कराया इसके बारे में लोगों को आज भी जानकारी नहीं है।

अपने फिल्मी करियर में ‘आग और शोला’, ‘अपने अपने’, ‘प्यार करके देखो’, ‘हवालात’, ‘नया कानून’, ‘दुश्मन’ जैसी फिल्मों में काम करने वाली मंदाकिनी आखिरी बार साल 1996 में फिल्म ‘जोरदार’ में नजर आई थीं। दाऊद के साथ नाम जुड़ने से मंदाकिनी का कैरियर समय से पहले ख़त्म हो गया। इसी बीच ख़बर आई कि दाऊद ने बंगलोर में प्लॉट खरीदा है। वेरीफ़ाई करने पर पता चला ज़मीन यास्मिन जोसेफ (मंदाकिनी का असली नाम) के नाम पर है। हालांकि मंदाकिनी ने हमेशा दाऊद संग किसी तरह के रिश्ते से हमेशा इनकार ही किया।

मामला इतना चर्चित हुआ कि मंदाकिनी को मजबूरन बयान देना पड़ा कि दाऊद से न तो उसका किसी तरह का रिलेशनशिप है, न ही वह डॉन की प्रेमिका है। 1995 में मंदाकिनी की प्रेगनेंट होने की ख़बर आई। मीडिया में ख़बर छपने लगी कि बच्चे का बाप दाऊद ही है। इसका राज़ तब खुला, जब मंदाकिनी ने दलाई लामा के शिष्य और बैद्ध भिक्षु डॉ. कैग्युर रिनपोछे से अपनी शादी को पब्लिक कर दिया। मंदाकिनी यह भी बताया कि वर्ष 1990 में उसने पूर्व बुद्धिस्ट मोंक डॉक्टर कग्यूर टी रिनपोचे ठाकुर से शादी कर ली और के दो बच्चें हैं, जिनमें बेटे का नाम राबिल और बेटी का इनाया ठाकुर है। मंदाकिनी दलाई लामा की फॉलोअर बन चुकी हैं और आजकल दक्षिण भारत और तिब्बत में योग सिखाने के लिए क्लासेस चलाती हैं। बहरहाल दाऊद-मंदाकिनी की फोटो का संज्ञान मुबई पुलिस ने भी लिया। उससे गहन पूछताछ हुई और अंत में उसे क्लीनचिट दे दी गई। बहरहाल, इन चर्चाओं ने मंदाकिनी का फ़िल्मी करीयर ख़त्म कर दिया। इस बीच दाऊद का नाम एक पाकिस्तानी मॉडल सबा से भी जुड़ा। जल्द ही सबा उसकी ख़ास दोस्त बन गई और उसे एक घर और कार उपहार में दे दिया।

बहरहाल, मुंबई का कमांडर बनाए जाने के बाद अबू सालेम ने बॉलीवुड पर ध्यान केंद्रित किया। दो तीन साल में पूरी इंडस्ट्री को गिरफ़्त में ले लिया। आतंक मचाने के लिए सुभाष घई और राजीव राय पर जानलेवा हमले करवाए। रियाज़ सिद्दिकी को मरवा भी दिया। सालेम की नज़र कैसेट किंग गुलशन कुमार पर थी। कुमार ने सुपर कैसेट्स और टी-सीरीज के सस्ते कैसेट बाज़ार में उतारे जिसे ज़बरदस्त मुनाफ़ा कमाया। देखते-देखते वह करोड़ों में खेलने लगे। सोनू निगम, अनुराधा पोडवाल और कुमार शानू जैसे सिंगर्स को ब्रेक दिया और स्थापित किया। माता वैष्णोदेवी दरबार में लंगर चलने लगा, जहां रोज़ाना हज़ारो श्रद्धालु मुफ़्त भोजन करते हैं। सालेम के हफ़्ते की मांग उन्होंने नहीं मानी। लिहाज़ा, 12 अगस्त 1997 की सुबह अंधेरी पश्चिम के जीतेश्वर महादेव मंदिर के पास राजन के शूटर राजा और उसके साथियों ने उनको बड़ी बेरहमी से दौड़ा-दौड़ा कर मार डाला। इससे राज्य सरकार बहुत नाराज़ हुई। सुभाष मल्होत्रा को हटाकर रॉनी मेंडोसा को नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया।

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जिस दिन मेंडोंसा ने चार्ज लिया उसी दिन वसंत ढोबले की टीम ने 28 अगस्त को अपराधी जावेद फावड़ा को बेलार्ड पीयर में एनकाउंटर में मार डाला। दावा किया कि गुलशन का हत्यारा मारा गया। बाद में लाश की शिनाख़्त अबू सायमा के रूप में हुई जो बांद्रा के मूंगफली बेचता था। उसकी बहन ने आरोप लगाया कि उसका भाई 26 अगस्त से ग़ायब था जिसकी रिपोर्ट दर्ज थी। हालांकि, बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुठभेड़ को सही बताया और कहा मारा गया व्यक्ति अपराधी फावड़ा ही था। मुंबई पुलिस चीफ़ ने सनसनीख़ेज़ खुलासा किया कि गुलशन की हत्या के लिए दाऊद को सुपारी संगीतकार नदीम-श्रवण के नदीम ख़ान सैफी ने दी थी। तब से नदीम फ़रार है और लंदन में पनाह लिए हुए हैं। हालांकि, बाद में सालेम दाऊद से अलग हो गया लेकिन उसका दबदबा सितारों और फ़िल्मकारों पर बरक़रार रहा। रितिक रौशन की सुपर हिट फ़िल्म के बाद उसके गुर्गों ने निर्माता राकेश रोशन पर जानलेवा हमला किया।

छोटा शकील कराची से बॉलीवुड में दबदबा बनाए रखा। उसके इशारे और उसके पैसे से ‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ फ़िल्म बनी। निर्देशन अब्बास मस्तान निर्देशित फ़िल्म में सलमान ख़ान, प्रीति ज़िंटा और रानी मुखर्जी ने अभिनय किया। 2001 में फिल्म रिलीज़ होने से पहले निर्माता नाज़िम रिज़वी, सहनिर्माता अब्दुल रहीम अल्लाबख्श और फ़ाइनेसर भरत शाह की शकील से टेलीफोन पर बातचीत ट्रैप कर ली गई। तीनों मकोका के तहत गिरफ्तार कर लिए गए। फ़िल्म विवाद में फंस गई। तत्कालीन पुलिस आयुक्त महेश नारायण सिंह ने बालीवुड और माफ़िया के गहरे संबंधों को उजागर करने का दावा किया था पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

मुंबई पुलिस ने सितारों को अदालत की चौखट तक घसीटा। शाहरुख, सलमान और रानी मुखर्जी इसमें शामिल थे। उनकी शकील से बातचीत का टेप भी तैयार किया। किसी भी अभिनेता ने शकील से रिश्ते की पुष्टि नहीं की। सिर्फ़ प्रीति ज़िंटा ने बहादुरी दिखाया और कहा कि उसके सेल पर शकील का फोन आया था। सलमान ने कहा कि फजलानी ने उसे फ़ीस न कम करने पर बुरे नतीजे भुगतने की धमकी दी थी और रिज़वी और अल्लाबख्श अभिनय की पेशकश लेकर आए। इससे बॉलीवुड-माफिया के बीच क़रीबी रिश्ते उजागर हुए। भरत शाह पर आरोप था, उसने शकील के कहने पर पूंजी लगायी। वह लंबे समय तक सलाखों के पीछे रहा। उसने बड़े वकीलों की सेवाएं ली और पहला ज़मानत पर रिहा हुआ फिर बरी भी हो गया। रिजवी और अल्लाबक्श को मकोका में छह साल की सज़ा हुई। वैसे अदालत की इजाज़त के बाद फिल्म रिलीज़ हुई और सुपरहिट रही।

बहरहाल, दाऊद ने दुबई के अल मंसूर वीडियो और कराची के सादाफ के बड़े हिस्से का खरीद लिया है। दोनों कंपनियां एशिया, यूरोप और अमेरिका में भारतीय फिल्मों की पाइरेटेड सीडी बेचने के लिए बदनाम हैं। सादाफ का सबसे बड़ा बाजार भारत है, जहां पाइरेसी विरोधी लचर क़ानून की वजह से माल आसानी से बिक जाता है। खुफिया अधिकारियों का दावा है कि भारत के एक अरब डॉलर के पाइरेसी बाजार के 70 फीसदी हिस्से पर सादाफ का कब्जा है।

(The Most Wanted Don अगले भाग में जारी…)

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