कोरोना के चलते ‘रिस्क जोन’ में हैं अमिताभ बच्चन

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सदी के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) के चाहने वालों के लिए यह बहुत अधिक राहत देने वाली ख़बर है कि कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के बाद भी बिग बी पर वायरस का संक्रमण माइल्ड है। उनका ऑक्सीजन लेवल भी 95 है, जो सामान्य बताया जा रहा है। लिहाज़ा, सब कुछ ठीक रहा तो संभावना यही है कि कुछ दिनों में ही कभी एंग्री यंगमैन रहे अमिताभ को नानावटी अस्पताल (Nanavati Hospital) से छुट्टी मिल जाएगी और वह फिर से जलसा में अपने परिवार के बीच होंगे।
स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं
हालांकि जब से बिग बी के कोरोना से संक्रमित होने की ख़बर आई है, तब से लाखों लोग उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं और बिग बी ने यह कहकर सभी चाहने वालों का आभार व्यक्त किया है कि दुआओं में ज़्यादा असर होता है। अमिताभ के लिए दुआ करने वालों में आम से खास तक, हर फील्ड के सेलेब्स से लेकर उनके फैंस तक शामिल हैं। फिलहाल अमिताभ बेटे अभिषेक बच्चन के साथ मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां दोनों की हालत बेहतर बताई जा रही है। चिकित्सा से जुड़े प्रोफेसनल्स का कहना है कि अगर कोरोना के माइल्ड संक्रमण काल में हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन इस कलाकार की मेडिकल हिस्ट्री पर ग़ौर करें तो उनके सेहत को लेकर अतिरिक्त चिंता होने लगती है। दरअसल, अमिताभ बच्चन को लिवर का संक्रमण अक्सर होता रहा है, जिससे वह समय-समय पर किसी न किसी अस्पताल में भर्ती होते रहे हैं। जहां दो तीन दिन बाद उन्हें छुट्टी मिल जाती रही है। इसके अलावा भी बिग बी स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याओं का सामना करते रहे हैं।
दो तरह के रिस्क जोन में
अमिताभ और अभिषेक दोनों में कोरोना के माइल्ड सिम्पटम्स ही नज़र आए हैं। इसके बावजूद अमिताभ बच्चन की तबीयत पर ख़ास नज़र रखी जा रही है। अमिताभ की 1982 के हादसे के बाद से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्या से जूझते रहे हैं। लिवर संक्रमण की समस्या के चलते अमिताभ चीन के वुहान से निकाली वैश्विक महामारी कोरोना वायरस यानी कोविड 19 के रिस्क जोन में बताए जाते हैं। अमिताभ बच्चन का इलाज कर चुके एक डॉक्टर ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण काल में फिलहाल अमिताभ दो तरह से रिस्क जोन में हैं। पहला, अमिताभ बच्चन की उम्र 77 साल हो चुकी है और डॉक्टरों का मानना है कि कोरोना वायरस का बहुत त्वरित असर बुजुर्ग लोगों ख़ासकर साठ साल की उम्र पार कर चुके लोगों पर बहुत अधिक होता है। दूसरा, कोरोना वायरस उन लोगों के लिए बहुत घातक साबित हो सकता है, जिन्हें पहले से लिवर, किडनी फेफड़े की कोई बीमारी या उच्च डायबिटीज है। अमिताभ बच्चन को लिवर की गंभीर समस्या है। इस लिहाज़ से कोरोना को माइल्ड संक्रमण या लक्षण भी उनकी सेहत के लिए बहुत बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है।

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सांस लेने में दिक्कत
11 अक्टूबर, 1942 को जन्मे अमिताभ बच्चन का इलाज कर चुके डॉक्टरों का भी कहना है कि उनके लिए कोरोना से लड़ना उतना आसान नहीं होगा, जितना समझा जा रहा है। माइल्ड कोरोना के बावजूद अमिताभ को सांस लेने में मुश्किलात का सामना करना पड़ रहा है। लिहाज़ा, उनकी उम्र और ट्यूबरक्यूलोसिस समेत पिछली बीमारियों के चलते उन्हें पूरी तरह रिकवर करने में वक़्त लग सकता है। ऐसे में जब तक कोरोना का प्रकोप ख़त्म नहीं हो जाता अमिताभ को अपने सारी शूटिंग्स और अन्य कार्यक्रम रद कर देना चाहिए। आपको जानकर हैरानी होगी कि 78 साल की उम्र में इतने सक्रिय बिग बी केवल 25 फ़ीसदी लिवर के सहारे इतना काम करते हैं, क्योंकि उनके लिवर का 75 फ़ीसदी हिस्सा काम ही नहीं करता है, क्योंकि हेपेटाइटिस इंफेक्शन के कारण लिवर खराब हो चुका है। 1982 के हादसे के बाद उनकी आंतें भी कमज़ोर हो गई हैं। इस वजह से उन्हें बार-बार अपना हेल्थ चेकअप करवाना और अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है।
माएस्थेनिया ग्रेविस की समस्या
इलाहाबाद के एक कायस्थ परिवार में जन्में अमिताभ बच्चन मांसपेशियों से संबंधी एक बीमारी माएस्थेनिया ग्रेविस से लड़ चुके हैं। इस बीमारी में कभी-कभार मांसपेशियों का नर्वस सिस्टम से कनेक्शन टूट जाता है। ‘कुली’ फ़िल्म की शूटिंग के दौरान हुए हादसे के बाद दवाइयों के भारी डोज की वजह से उन्हें माएस्थेनिया ग्रेविस बीमारी हुई थी इसकी वजह से वह मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो गए थे और डिप्रेशन में चले गए थे। हालांकि अब उससे उबर चुके हैं। लोगों को शायद पता नहीं कि सदी के महानायक को समय-समय पर अस्थमा की भी है शिकायत होती है। चूंकि अस्थमा फेफड़ों से जुड़ी बीमारी होती है, इसलिए कह सकते हैं कि उनका फेफड़ा अपेक्षाकृत कमज़ोर है। अस्थमा में बॉडी के एयरवेज नैरो हो जाते हैं और ऑक्सीजन सही मात्रा में फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाती है, जिससे सांस लेने में बहुत दिक्कत होती है। इसके अलावा अमिताभ बच्चन टीबी से जंग लड़ चुके हैं। दरअसल, उन्हें 2000 में टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस डिटेक्ट हुआ था। हालांकि उन्होंने समय रहते दवा ली और टीबी से एकदम ठीक हो गए।
2005 में हुई एबडोमिनल सर्जरी
मशहूर कवि हरिवंशराय बच्चन और रंगकर्मी तेजी बच्चन के सुपुत्र अमिताभ बच्चन की कुछ साल पहले एबडोमिनल सर्जरी भी हुई थी। साल 2005 में उनके पेट में तेज दर्द हुआ। पहले लगा कि ये गेस्ट्रो संबंधी समस्या है, लेकिन चेकअप में सामने आया कि उन्हें इंटेस्टाइन संबंधी समस्या है। डाइवर्टिक्युलाइटिस ऑफ स्मॉल इंटेस्टाइन नाम की इस बीमारी को ठीक करने के लिए अमिताभ को सर्जरी करवानी पड़ी थी। डॉक्टरों का कहना था कि अगर इस समस्या का समय रहते उपाय न किया गया होता, तो ये घातक साबित हो सकता था। इस बीमारी में छोटी और बड़ी आंत कमजोर हो जाती है और उसमें सूजन आ जाती है। उस समय भी अमिताभ के करोड़ों प्रशंसक उनके बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य की कामना की थी।
2012 में हुई लिवर की सर्जरी
बिग बी ही ने कुछ साल पहले यह खुलासा किया था कि उन्हें लिवर सिरोसिस की समस्या भी है। हालांकि यह समस्या अत्यधिक शराब पीने वालों को होती है और अमिताभ शराब का सेवन नहीं करते, इसके बावजूद वह लिवर सिरोसिस के शिकार हो गए। इसी बीमारी के चलते 2012 में सर्जरी करके उनके लिवर का 75 फीसदी संक्रमित हिस्सा काटकर अलग कर दिया गया। लिहाजा, उनके लिवर का फंक्शन कमजोर हो गया। 1982 के हादसे ने उनके पेट के इंटरनल पोर्शन को इतना नुकसान पहुंचाया कि अभी तक उसके साइड इफेक्ट सामने आते रहते हैं। कहने का मतलब बिग-बी 25 फीसदी लिवर के साथ ज़िंदा ही नहीं हैं, बल्कि 77 साल की उम्र में भी इतना काम कर रहे हैं।

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कुली की शूटिंग में लगी चोट
दरअसल, अमिताभ की सेहत ख़राब होने का सिलसिला 1982 से शुरू हुआ, जब प्रयाग राज और मनमोहन देसाई द्वारा निर्देशित फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान हुए एक हादसे में उनको चोट लग गई थी। वह हादसा बैंगलोर में ज्ञान भारती विश्वविद्यालय के परिसर में हुआ था। विश्वविद्यालय के पुस्तकालय के एक किनारे शूटिंग का सेट लगाया गया था। जहां अमिताभ और विलेन पुनीत इस्सर के बीच फाइट के सीन का फिल्मांकन करना था। फाइट सीन के दौरान पुनीत के प्रहार के बाद अमिताभ कलाबाजी खाकर एक टेबल पर गिर पड़े थे। लेकिन जब पुनीत ने फाइट मारी तो वह सीधे अमिताभ के पेट के निचले हिस्से में अतड़ी में लगी और जब अमिताभ लोहे की टेबल पर गिरे तब भी चोट उनकी अतड़ी में ही लगी। शूटिंग के लिहाज से वह शानदार था, लेकिन उससे उनकी ज़िंदगी ही खतरे में पड़ गई। प्रारंभ में सभी ने शॉट की सराहना की। अमिताभ ने प्रशंसा ग्रहण किया लेकिन उनके पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द होने लगा। जैसे ही वह गार्डन एरिया में आए, वहीं ज़मीन पर गिर पड़े। इसके बाद उनको बेंगलुरु के अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनकी अतड़ी में गंभीर चोट है। आनन-फानन में अमिताभ को एयर लिफ्ट करके मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में लाया गया। यहां उनकी सर्जरी हुई। इसके बाद वह कोमा में चले गए और डॉक्टरों ने उन्हें क्लीनिकली डेड घोषित कर दिया था।
डोनर से मिला हेपेटाइटिस
बताया जाता है कि काफी खून बह जाने के कारण उन्हें ख़ून की ज़रूरत थी। ब्रीच कैंडी अस्पताल के सामने खून देने वालों का तांता लग गया। 200 ब्लड डोनर्स से मिला खून उनको चढ़ाया गया था। दो महीने के इलाज के बाद वह ठीक हो गए और जनवरी 1983 में शूटिंग भी शुरू कर दी। उसी साल कुली रिलीज हुई और सुपरहिट रही। कई लोग कहते हैं कि लोग अमिताभ के घायल होने वाल शॉट देखना चाहते थे, इसीलिए सिनेमा हाल में बहुत अधिक भीड़ जुट रही थी।बहरहाल, उस हादसे के कारण उन्हें एक और बीमारी ने जकड़ लिया, जिसका पता 18 साल बाद चला। दरअसल, ब्रीच कैंडी में जिन डोनर्स का खून अमिताभ को चढ़ाया गया, उनमें से एक हेपेटाइटिस बी था। उससे हेपेटाइटस के वायरस अमिताभ के शरीर में प्रवेश कर गए। सन् 2000 तक वे ठीक रहे, मगर उसके बाद सामान्य मेडिकल चेकअप के दौरान यह पता चला कि उनका लिवर संक्रमित है।
अमिताभ गजब के लड़ाके
अमिताभ बच्चन में बीमारियों के लड़ने का इतना माद्दा कहां से आया इसकी भी एक रोचक दास्तां है। दरअसल, अमिताभ के पिता स्वतंत्रता संग्राम से प्रभावित थे। लिहाज़ा, किसी ने अमिताभ के जनम के बाद उनका नाम इंकलाब रखने का सुझाव दिया। लेकिन संयोग से उसी समय प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत आ गए और उन्होंने कहा कि यह लड़ने वाला बालक है, जगत में रोशनी करेगा, इसलिए इसका नाम ‘अमिताभ’ रखिए, ‘अमिताभ’ का अर्थ ‘शाश्वत प्रकाश’ है। पंत की बात सच साबित हुई। अमिताभ गजब के लड़ाके हैं। कई बीमारियों को मात दे चुके हैं।

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जब नाराज़ हुए थे बिग बी
दादासाहेब फाल्के पुरस्कार पा चुके अमिताभ पिछले साल अक्टूबर में भी नानावटी अस्पताल में भर्ती होने की ख़बर के वायरल होने से ख़ासे नाराज हो गए थे। इसे लेकर उन्होंने अपने ब्लॉग में अपना दर्द बयां किया था। अमिताभ ने लिखा था- प्लीज़ पेशेवर दस्तावेजों के नियम-कायदों को न तोड़ें। बीमार होना और इलाज कराना गोपनीय व्यक्तिगत अधिकार है। उसे पब्लिक करना एक तरह का शोषण है। इसका कारोबारी इस्तेमाल सामाजिक रूप से गलत है। सम्मान करें और बात को समझें। दुनिया में हर चीज बेचने के लिए नहीं होती है। हालांकि अमिताभ ने चिंता करने वालों का आभार भी जताया था। अपने ब्लॉग में बिग बी ने उन लोगों का शुक्रिया भी अदा किया था, जिन्होंने उनकी सेहत को लेकर चिंता जाहिर की थी और जल्द स्वस्थ होने की कामना की थी।
होंगे कामयाब एक दिन
पांच दशक से अधिक के करियर में सात हिंदुस्तानी से गुलाबो सिताबो तक सैकड़ों फिल्मों में तरह तरह के किरदारों में रूपहले परदे पर दिखने वाले अमिताभ की हेल्थ ने उनका साथ छोड़ा है। कई बार वह गंभीर रूप से बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती हुए। हर बार अपने विल पावर, दुनिया भर में चाहने वालों की दुआओं और डॉक्टरों के प्रयास से वह ज़िंदगी की जंग जीतकर आते रहे हैं। बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय अभिनेता बिग बी की ख़ासियत यह है कि वह अक्सर अपने ब्लॉग और ट्विटर के माध्यम से अपना हेल्थ अपडेट अपने चाहने वालों के साथ शेयर करते रहते हैं। कोरोना से संक्रमित होने की सूचना दुनिया को उन्होंने ख़ुद दी। अब देश ही नहीं, विदेश में भी लोग उनके लिए दुआएं कर रहे हैं। संभवतः यह अमिताभ के चाहने वालों की दुआओं और ख़ुद अमिताभ का जुनून है कि वह इतनी बीमारियों को हराते हुए इस उम्र में इतने सक्रिय हैं। ऐसे में सब लोगों को पूरा विश्वास है कि अमिताभ जल्द ही स्वस्थ होकर सबके बीच फिर लौटेंगे।

लेखक – हरिगोविंद विश्वकर्मा

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