क्यों 26 जनवरी को ही मनाया जाता है भारतीय गणतंत्र दिवस?

0
905

भारतीय गणतंत्र का इतिहास

भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था और 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था।उसके बाद भारत को लोकतांत्रिक, संप्रभु तथा गणतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया। आज भले देश भले 72वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, लेकिन यह गणतंत्र समारोह 1930 से मनाया जा रहा है। गणतंत्र राष्‍ट्र के बीज 31 दिसंबर 1929 की मध्‍य रात्रि में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के लाहौर (अब पाकिस्तान) सत्र में बोए गए थे। सत्र की अध्यक्षता पंडित जवाहर लाल नेहरू की थी। लाहौर सत्र में नागरिक अवज्ञा आंदोलन का मार्ग प्रशस्‍त किया गया। अधिवेशन में उपस्थित लोगों ने 26 जनवरी को स्‍वतंत्रता दिवस के रूप में अंकित करने की शपथ ली थी ताकि ब्रिटिश राज से पूर्ण स्‍वतंत्रता के सपने को साकार किया जा सके। अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज सरकार 26 जनवरी 1930 तक भारत को स्वायत्त उपनिवेश (डोमीनियन) का पद नहीं प्रदान करेगी, जिसके तहत भारत ब्रिटिश साम्राज्य में ही स्वशासित एकाई बन जाता, तो भारत अपने को पूर्णतः स्वतंत्र घोषित कर देगा।

इसे भी पढ़ें – गांधी और ग्राम गणराज्य

यह भी निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्‍वराज दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पूरे भारत से अनेक भारतीय राजनैतिक दलों और भारतीय क्रांतिकारियों ने सम्‍मान और गर्व सहित इस दिन को मनाने के प्रति एकता दिखाई थी। 26 जनवरी 1930 आया और गुज़र भी गया। जब अंग्रेज सरकार ने कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने 26 जनवरी 1030 के दिन भारत पूर्ण स्वतंत्रता के संकल्प की घोषणा कर दी और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ कर दिया। उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त होने तक 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। बहरहाल, स्वतंत्रता मिलने के बाद 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में स्वीकार किया गया।

इसे भी पढ़ें – क्या ‘अगस्त क्रांति’ ही देश के विभाजन की वजह बनी…?

भारत के आज़ाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई। 9 दिसंबर 1947 को संविधान सभा का गठन किया गया, जो 2 साल 11 महीने 18 दिन में पूरा हो गया। संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे। डॉ. भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और मौलाना अबुल कलाम आजाद समेत इस सभा में कुल 308 सदस्य थे। संविधान निर्माण में कुल 22 समितियां बनाई गई थीं जिसमें प्रारूप समिति (ड्राफ्टिंग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी। इस समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना’ या ‘निर्माण करना’ था। प्रारूप समिति के अध्यक्ष विधिवेत्ता डॉ. आंबेडकर थे। प्रारूप समिति ने भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद को 26 नवंबर 1949 को भारत संविधान सुपूर्द किया। इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इसे भी पढ़ें – क्या आप जानते हैं, क्या था काकोरी कांड?

संविधान सभा ने संविधान निर्माण के समय कुल 114 दिन बैठक की। इसकी बैठकों में प्रेस और जनता को भाग लेने की स्वतन्त्रता थी। अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के कुल 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किए। इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को यह देश भर में लागू हो गया। 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई। 395 अनुच्‍छेदों और 8 अनुसूचियों के साथ भारतीय संविधान दुनिया में सबसे बड़ा लिखित संविधान है।

इसे भी पढ़ें – क्या सचमुच भारत गुलाम था, जो आजाद हुआ?

भारतीय संविधान के विभिन्न प्रावधान विभिन्न देशों के संविधान से लिए गए हैं। मसलन, ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली, विधि निर्माण और एकल नागरिकता का प्रावधान लिया गया है। अमेरिका से न्यायिक, स्वतंत्रता का अधिकार और मौलिक अधिकार लिए गए हैं। ‪जर्मनी से आपातकाल का सिद्धांत अंगीकार किया गया है, तो ‪फ्रांस से गणत्रंतात्मक शासन व्यवस्था ली गई है। इसी तरह ‪कनाडा से सत्ता का विकेंद्रीकरण यानी राज्यों में शक्ति का विभाजन संबंधी प्रावधान लिया गया है। देश के संविधान के नीति निदेशक तत्व आयरलैंड ले लिए गए हैं तो ‪ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची की व्यवस्था ली गई है। ‪दक्षिणअफ्रीका से संविधान संशोधन की प्रक्रिया को आयात किया गया है तो मूल कर्तव्य सोवियत ‪रूस से लिया गया है। इस तरह भारतीय संविधान कुल नौ देशों का संविधान है।

इसे भी पढ़ें – आखिर क्यों संविधान को जलाना चाहते थे अंबेडकर?

26 जनवरी 1950 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने 21 तोपों की सलामी के साथ ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया। संविधान लागू होने के बाद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने वर्तमान संसद भवन के दरबार हॉल में राष्ट्रपति की शपथ ली थी और इसके बाद पांच मील लंबे परेड समारोह के बाद इरविन स्टेडियम में उन्होंने राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया था। यह ऐतिहासिक क्षणों में गिना जाने वाला समय था। इसके बाद से हर वर्ष इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। हमारा संविधान देश के नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी सरकार चुनने का अधिकार देता है। इस दिन देशभर में राष्ट्रीय अवकाश रहता है।

इसे भी पढ़ें – जाति बहिष्कृत होने के बाद जिन्ना के पिता हिंदू से मुसलमान बन गए

26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह पर देश के राष्ट्रपति भारतीय राष्ट्र ध्वज फहराते हैं। इसके बाद सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है। फिर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को सलामी दी जाती है। गणतंत्र दिवस को पूरे देश में विशेष रूप से भारत की राजधानी दिल्ली में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर के महत्व को चिह्नित करने के लिए हर साल एक भव्य परेड इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक राजपथ पर आयोजित किया जाता है। इस भव्य परेड में भारतीय सेना के विभिन्न रेजिमेंट, वायुसेना, नौसेना भाग लेते हैं। परेड में विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेश और विभिन्न मंत्रालयों की प्रदर्शनी भी होती हैं, जिसमें हर उनकी विशेषता, लोक गीत, लोक कला एवं संस्कृति की झांकी प्रस्तुत की जाती है। हर प्रदर्शिनी भारत की विविधता व सांस्कृतिक समृद्धि प्रदर्शित करती है। समारोह में भाग लेने के लिए देश के सभी हिस्सों से राष्ट्रीय कडेट कोर और विभिन्न विद्यालयों से बच्चे आते हैं। समारोह में भाग लेना सम्मान की बात होती है।

इसे भी पढ़ें – मुंबई जो भी आ गया, यह शहर उसी का हो गया

परेड प्रारंभ करते हुए प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति (सैनिकों के लिए एक स्मारक) जो राजपथ के एक छोर पर इंडिया गेट पर स्थित है पर पुष्प माला अर्पित करते हैं। इसके बाद शहीद सैनिकों की स्मृति में दो मिनट मौन रखा जाता है। यह देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए लड़े युद्ध व स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों के बलिदान का एक स्मारक है। इसके बाद प्रधानमंत्री, अन्य व्यक्तियों के साथ राजपथ पर स्थित मंच तक आते हैं, राष्ट्रपति बाद में अवसर के मुख्य अतिथि के साथ आते हैं। परेड और जुलूस राष्ट्रीय टेलीविजन पर प्रसारित होता है और देश के हर कोने में करोड़ों दर्शक देखते हैं।

संपूर्ण रामायण पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें